लखनऊ में घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। खाड़ी देशों में युद्ध की आशंकाओं और जमाखोरी के कारण मांग आठ गुना तक बढ़ गई है।
लखनऊ। घरेलू गैस को लेकर कोहराम मचा है। खाड़ी देशों में युद्ध लंबा खिंचने की आशंकाओं और असुरक्षा के चलते उपभोक्ताओं के बीच एलपीजी बुकिंग कराने के लिए होड़ मची है। 25 दिन की समय सीमा होने के बावजूद शहर में एलपीजी की डिमांड अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही है।
सीतापुर रोड स्थित गैस एजेंसी जहां पर आम दिनाें में 500 से 550 सिलेंडरों की डिमांड रहती थी वहां गुुरुवार को बुकिंग का आंकड़ा 4000 तक पहुंच गया। खुद एजेंसी संचालक आठ गुणा बुकिंग से हैरान हैं। उनका कहना है कि अचानक बढ़ी इस डिमांड को पूरा करना आसान नहीं होगा। शहर की दूसरी एजेंसियों का भी यही हाल है।
लखनऊ में पिछले दो दिनों में बुधवार और गुरुवार को तीनों तेल कंपनियों इंडियन आयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने लखनऊ में 72412 सिलेंडर आपूर्ति के लिए डिपो से भेजे हैं। लखनऊ में कुल 7.5 लाख उपभोक्ता हैं जिनमेंं ढाई लाख उज्ज्वला लाभार्थी हैं।
लखनऊ के कुल 80 गैस एजेंसियों की बुकिंग की बात करें तो गुरुवार को बुकिंग का आंकड़ा एक लाख को पार कर गया। डिमांड के अनुरूप अगर स्टाक देखें तो वह आधा भी नहीं है। यही वजह है कि गैस एजेंसियों के बाहर कतारें कम नहीं हो रही हैं और लोगों को गैस मिलने में समय लग रहा है।
पुराने शहर के एक एजेंसी संचालक का कहना है कि छह सौ से सात सौ बुकिंग प्रतिदिन होती थी जो गुरुवार को अचानक बढ़कर दो हजार से अधिक पहुंच गईं। जो लोग दो तीन महीने में एक बार सिलेंडर बुक कराते हैं वह भी सिलेंडर की डिमांड कर रहे हैं।
उज्ज्वला लाभार्थी भी बड़ी संख्या में बुकिंग कराने के लिए आ रहे हैं। उनको प्रतिवर्ष नौ सिलेंडर तक सब्सिडी मिलती है। जिलापूर्ति अधिकारी विजय प्रकाश सिंह का कहना है कि होली से ही लगातार गैस की आपूर्ति बढ़ी हुई है। लोगों से अपील है कि जिनको जरूरत है केवल वह लोग ही गैस बुक कराएं।
दो दिन की आपूर्ति
बीपीसीएल
बुधवार-12420
गुरुवार-12000
आइओसीएल
बुधवार-15378
गुरुवार – 15875
एचपीसीएल
बुधवार-8239
गुरुवार-8500
अचानक बुकिंग बढ़ने के मुख्य कारण
- युद्ध खिंचने की आशंका के कारण लोग अधिक से अधिक बुकिंग चाहते हैं। जो लोग वर्ष में चार-पांच सिलेंडर ही लेते थे वे लोग भी बुुक कर रहे हैं।
- कई लोग आपदा में अवसर तलाश रहे हैं और जमाखोरी कर मुनाफा कमा रहे हैं। नौ सौ रुपये का सिलेंडर लेकर डेढ़ से दो हजार रुपये में बेच रहे हैं
- बड़ी संख्या में उज्जवला के लाभार्थी जो वर्ष में कम अपने कोटे से कम ही सिलेंडर लेते हैं वह भी बड़ी संख्या में बुकिंग कराने के लिए आ रहे हैं
- हजारों की संख्या में ऐसे उपभोक्ता हैं अपने कोटे के सिलेंडर का पूरा उपयोग नहीं करते हैं लेकिन दूसरों काे करने के लिए बुकिंग करा रहे हैं





