राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के आदेश के बाद अमेरिकी जनता में पूर्व के युद्धों जैसा समर्थन नहीं दिख रहा है। सर्वेक्षणों के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी इस हमले का विरोध कर रहे हैं, जिसका समर्थन 27-50% के बीच है।
राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के आदेश के बाद अमेरिका के भीतर एक दिलचस्प और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पूर्व के सैन्य संघर्षों के विपरीत, इस बार अमेरिकी जनता युद्ध के पक्ष में उतनी एकजुट नजर नहीं आ रही है। ताजा सर्वेक्षणों के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी ईरान पर किए गए हमलों का विरोध कर रहे हैं।
रायटर/इप्सोस और फाक्स न्यूज के सर्वेक्षण बताते हैं कि इस सैन्य कार्रवाई को मिलने वाला समर्थन 27 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच झूल रहा है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि जैसे-जैसे हमले का विवरण और उसके परिणाम सामने आ रहे हैं, जनमत अभी भी स्थिर नहीं हुआ है।
अमेरिकी नहीं चाहते थे हमला
ऐतिहासिक युद्धों और वर्तमान स्थिति का अंतर अगर हम इतिहास पर नजर डालें, तो द्वितीय विश्व युद्ध, कोरियाई युद्ध या इराक युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी जनता का समर्थन अभूतपूर्व था। ‘गैलप’ के सर्वेक्षण के अनुसार, पर्ल हार्बर पर हमले के बाद जब अमेरिका ने जापान के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी, तब 97 प्रतिशत जनता सरकार के साथ थी।
इसी तरह, अफगानिस्तान में सेना भेजने के फैसले को 92 प्रतिशत अमेरिकियों का समर्थन प्राप्त था। यहां तक कि इराक युद्ध की शुरुआत के अगले दिन भी 76 प्रतिशत अमेरिकियों ने युद्ध के फैसले पर अपनी मुहर लगाई थी।
सर्वे में खुलासा
लायोला यूनिवर्सिटी शिकागो में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एसोसिएट प्रोफेसर सारा मैक्सी कहती हैं, ‘2003 के इराक युद्ध से पहले, हमारे पास एक पूरा साल था जिसमें यह समझाया गया कि यह युद्ध क्यों जरूरी है और अन्य विकल्प क्यों खत्म हो चुके हैं। बिना किसी स्पष्ट संचार रणनीति के हमने पहले कभी इतने बड़े विदेशी संघर्ष नहीं देखे।’
राजनीतिक ध्रुवीकरण और ‘रैली अराउंड द फ्लैग’ का अंत विशेषज्ञों का मानना है कि इस कम समर्थन के पीछे अमेरिका में बढ़ता राजनीतिक ध्रुवीकरण एक बड़ी वजह है। शोधकर्ता इसे ‘रैली अराउंड द फ्लैग’ प्रभाव कहते हैं, जहां संकट के समय विपक्षी दल के लोग भी राष्ट्रपति के पीछे खड़े हो जाते हैं। लेकिन पिछले 30 वर्षों में यह प्रभाव काफी कम हुआ है।
डेमोक्रेट्स अब ट्रंप के साथ नहीं
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैथ्यू बाम का कहना है कि डेमोक्रेट्स अब ट्रंप के पीछे एकजुट होने को तैयार नहीं हैं। वे कहते हैं, ‘जहां तक राष्ट्रपति के अपने आधार का सवाल है, उनके समर्थक यह मानते हैं कि उन्होंने ट्रंप को युद्धों से बाहर निकलने के लिए चुना था, न कि नए युद्ध शुरू करने के लिए।’
इतिहास गवाह है कि वियतनाम युद्ध की शुरुआत में 60 प्रतिशत लोग इसके समर्थन में थे, लेकिन हताहतों की संख्या बढ़ने के साथ ही 1969 तक बहुमत इसे ‘गलती’ मानने लगा था। आज स्थिति यह है कि राजनीति अब ‘देश की सीमा’ पर आकर नहीं रुकती; वह सैन्य फैसलों के साथ भी गहराई से जुड़ गई है।





