Monday, March 2, 2026
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HomeUttar PradeshGorakhpurगांव की घरेलू महिला नहीं अब उद्यमी कही जाती हैं निर्मला

गांव की घरेलू महिला नहीं अब उद्यमी कही जाती हैं निर्मला

महिला सशक्तिकरण : ग्रामीण आजीविका मिशन से आया जीवन में बदलाव

ब्रह्मपुर ब्लॉक की निर्मला देवी ने लगाया गृह उद्योग, दो क्विंटल प्रतिदिन हो रहा नमकीन व पापड़ का उत्पादन

खुद स्वावलंबी बनीं निर्मला, आठ अन्य महिलाओं को भी दिया रोजगार

गोरखपुर । महिलाओं को आत्मनिर्भर, आय अर्जक और रोजगारप्रदाता बनाने की योगी सरकार की प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप गांव की घरेलू महिलाएं भी उद्यमी की कतार में नजर आती हैं। आधी आबादी को स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार का राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) काफी कारगर सिद्ध हो रहा है। इस मिशन से जुड़ने वाली महिलाओं का जीवन संवरने लगा है। ग्रामीण आजीविका मिशन से मिलने वाली ऋण सुविधाओं का उपयोग कर घरेलू महिलाएं खुद उद्यमी बनकर दूसरों को भी रोजगार दे रही हैं। ऐसी ही एक महिला हैं ब्रह्मपुर ब्लॉक के ग्राम जंगल रसूलपुर नम्बर-2 की निर्मला देवी। निर्मला अब घरेलू महिला नहीं बल्कि प्रेरक उद्यमी कही जाती हैं।

ग्रामीण आजीविका मिशन की सुविधाओं से आच्छादित महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी घरेलू महिलाएं आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की नई कहानी लिख रही हैं। इन्हीं में शामिल ब्रह्मपुर विकास खंड के जंगल रसूलपुर नम्बर-2 गांव की निर्मला देवी ने भी आर्थिक स्वावलंबन की नजीर पेश की है। निर्मला ग्रामीण गृहिणी थीं। पति ऑटो चलाते थे तो किसी तरह परिवार का पालन पोषण होता था। निर्मला परिवार के लिए खुशहाल और समृद्ध माहौल देना चाहती थीं। ऐसे में जब उन्हें ग्रामीण आजिविका मिशन के उद्देश्यों की जानकारी हुई तो उन्होंने 10 महिलाओं के साथ शिखर महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसके बाद उन्होंने स्वरोजगार के लिए शिखर गृह उद्योग के नाम से नमकीन और पापड़ बनाने का कार्य शुरू कर दिया।

नमकीन और पापड़ बनाने का गृह उद्योग लगाने में उन्हें 2 लाख 10 हजार रुपये का समूह लोन प्राप्त हुआ। एनआरएलएम के संबल से उनका गृह उद्योग सफलता की राह पर बढ़ चला। निर्मला देवी अपने गृह उद्योग से प्रतिदिन औसतन दो क्विंटल नमकीन और पापड़ का उत्पादन कर थोक व फुटकर बाजार में बेच रही हैं। उनके पति केशभान जो पहले ऑटो चलाते थे, वह भी गृह उद्योग की मार्केटिंग से जुड़ गए हैं। निर्मला के गृह उद्योग से आठ अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा एक कारीगर भी 15 हजार रुपये मासिक मानदेय पर रोजगाररत है। निर्मला को अपने गृह उद्योग से औसतन 60 हजार रुपये प्रतिमाह की आय प्राप्त हो रही है। उपायुक्त स्वतः रोजगार नीरजा गुप्ता बताती हैं कि वार्षिक आय के आधार पर निर्मला देवी लखपति दीदी भी बन चुकी हैं।

आजीविका मिशन के तहत गोरखपुर में 21 हजार से अधिक समूहों का गठन

गोरखपुर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत अब तक 21020 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इनमें से 20667 समूह मिशन के पोर्टल पर हैं। इन समूहों के माध्यम से 294815 परिवार आच्छादित किए गए हैं। जिले में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए 18059 समूहों को रिवॉल्विंग फंड की धनराशि, 14449 समूहों को सीआईएफ तथा 11925 समूहों को बैंक क्रेडिट लिंकेज कराया गया है।

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