मौदहा (हमीरपुर)। ग्राम पंचायत सचिवों का शांतिपूर्ण सत्याग्रह आंदोलन शुक्रवार को 12वें दिन भी जारी रहा। अपनी 10 सूत्रीय मांगों को मनवाने के लिए सचिवों ने साइकिल सत्याग्रह का अनूठा तरीका अपनाते हुए शासन द्वारा दिए जाने वाले साइकिल भत्ते के अनुरूप ही सभी सरकारी कार्य, फील्ड विजिट और गांवों में भ्रमण करने का निर्णय लिया है।
ग्राम पंचायत अधिकारी संघ एवं ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के आह्वान पर सचिव बुधवार से निजी वाहनों का पूर्ण बहिष्कार कर चुके हैं। सचिवों का कहना है कि जब वाहन खर्च के लिए उचित प्रावधान नहीं मिलता तो वे भी शासन के अनुसार साइकिल से ही काम करेंगे। उनका उद्देश्य साइकिल सत्याग्रह के माध्यम से सरकार तक अपनी समस्याओं का स्पष्ट संदेश पहुंचाना है।
10 सूत्रीय मांगों को लेकर अड़े सचिव
ग्राम सचिवों ने 1 दिसम्बर को विकास खंड कार्यालय के बाहर एकत्र होकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा था। उनकी प्रमुख मांगों में ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को तत्काल समाप्त करना, विभागीय दायित्वों के अलावा अन्य विभागों के कार्यों का अतिरिक्त बोझ न डालना, सेवा संबंधी विसंगतियों का निस्तारण, विभागीय ढांचे में सुधार, सचिवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कार्य के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना शामिल है। सचिवों का कहना है कि संसाधनों की कमी ग्रामीण विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है, जिसे दूर किया जाना आवश्यक है।
सचिवों ने दिखाई मजबूती और एकजुटता
साइकिल सत्याग्रह में नितेश चंदेल, शिवमूरत सिंह, नीरज पटेल, हरी बाबू, अरविन्द कुमार, प्रियंका पटेल, स्वाति शर्मा, भूपेन्द्र कुमार, अरविन्द पाल सहित बड़ी संख्या में ग्राम सचिवों ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसका असर ग्रामीण विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।





