हजपुरा, अम्बेडकरनगर जलालपुर तहसील क्षेत्र के रसूलपुर बाकरगंज गांव में रविवार को दिवंगत ख्वाजा हादी हसन के इसाले सवाब की मजलिस अकीदतमंदी के साथ आयोजित हुई। मजलिस की शुरुआत तिलावत-ए-कलाम पाक से हुई। इस मौके पर मौलाना सैयद नूरुल हसन ने बच्चों की तालीम और उनके बेहतर संस्कारों को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा और अच्छे संस्कार मिलकर ही एक सफल जिंदगी व मजबूत समाज की नींव रखते हैं। लखनऊ से आए मौलाना सैयद यूसुफ अहमद मशहदी ने कहा कि इस्लाम का पैगाम हमेशा से इंसानियत, अमन और भाईचारे का रहा है। उन्होंने पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासों, हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन अ.स की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए कहा कि इस्लाम आज दुनिया भर में कायम है तो यह अहले-बैत की शहादतों की बदौलत है।
मौलाना ने बताया कि हजरत अली से लेकर इमाम हसन व हुसैन अ.स तक, अहले-बैत ने दीने इस्लाम की हिफाजत के लिए अपनी जानों तक की कुर्बानी देने में परहेज नहीं किया। मौलाना ने कहा कि मौजूदा दौर में जरूरी है कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ दीने इस्लाम की बुनियादी जानकारी भी दी जाए, जिससे इमामों का पैगाम नई नस्ल तक पहुंच सके। आखिर में कर्बला के शहीदों का जिक्र होते ही माहौल भावुक हो उठा और मोमनीन की आंखें नम हो गईं।





