Tuesday, March 3, 2026
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IPO News: पहले ही दिन ओवरसब्सक्राइब हुआ LG Electronics का आईपीओ, फिर भी GMP में आई गिरावट; आखिर क्यों

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का आईपीओ (LG Electronics IPO) 7 अक्टूबर को खुला और पहले दिन ही 1.05 गुना सब्सक्राइब हो गया। हालाँकि कंपनी के जीएमपी में गिरावट आई है जो 6 अक्टूबर को 318 रुपये से गिरकर 298 रुपये पर आ गया है। आईपीओ (IPO News Today) का प्राइस बैंड 1080-1040 रुपये है। एसबीआई सिक्योरिटीज ने आईपीओ को सब्सक्राइब करने की सलाह दी है।

मंगलवार 7 अक्टूबर से एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का आईपीओ (LG Electronics IPO) खुल गया और पहले ही दिन इसका पब्लिक इश्यू ओवरसब्सक्राइब हो गया। पहले दिन एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के आईपीओ (IPO News Today) को 1.05 गुना सब्सक्राइब कर लिया गया है। मगर बावजूद इसके कंपनी के जीएमपी (LG Electronics GMP Price Today) में गिरावट आई है।

कितना रह गया जीएमपी

इंवेस्टरगेन के अनुसार एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का जीएमपी 6 अक्टूबर को 318 रुपये पर पहुंच गया था, जो कि 7 अक्टूबर को गिरकर 298 रुपये पर आ गया। इसके बाद आज 8 अक्टूबर को भी इसका जीएमपी 298 रुपये ही दिख रहा है।

कितने प्रॉफिट की उम्मीद

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के आईपीओ में प्राइस बैंड 1080-1040 रुपये है। ऊपरी भाव यानी 1040 रुपये के हिसाब से भी मौजूदा जीएमपी के आधार पर निवेशकों को 26 फीसदी से अधिक रिटर्न मिल सकता है। जीएमपी लिस्टिंग तक घटता-बढ़ता रहता है।

इसके आईपीओ में शेयरों की लॉट साइज 13 शेयरों की है। यानी आप मिनिमम 13 शेयर और फिर इसी की गुणा में आवेदन कर सकते हैं।

एसबीआई सिक्योरिटीज ने दी सब्सक्राइब करने की सलाह

एसबीआई सिक्योरिटीज ने एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के आईपीओ पर कहा है कि एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की सबसे बड़ी घरेलू इक्विपमेंट और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में से एक है, जो कई प्रोडक्ट कैटेगरी में मार्केट लीडरशिप रखती है। 1,140 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर, इस इश्यू का मूल्य 35.1x के पी/ई मल्टीपल पर है, जो अन्य प्रतिस्पर्धियों की तुलना में आकर्षक लगता है। इसने निवेशकों को इस इश्यू में निवेश करने की सलाह दी है।

कैसे रहे फाइनेंशियल रिजल्ट

एलजी का रेवेन्यू और नेट प्रॉफिट वित्त वर्ष 23 और वित्त वर्ष 25 के बीच सालाना 10.8% और 28% बढ़कर क्रमशः ₹24,366.6 करोड़ और ₹2,203.4 करोड़ हो गया। इसका EBITDA मार्जिन वित्त वर्ष 23 के 9.5% से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में 12.8% हो गया।

कंपनी अपने ब्रांड नाम के लिए अपनी पैरेंट कंपनी को रॉयल्टी का भुगतान करती है, जो वित्त वर्ष 25 तक हर साल 2% से कम रही। वहीं इसकी अन्य प्रतिस्पर्धि कंपनियां आमतौर पर 2-3% रॉयल्टी का भुगतान करती हैं।

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