बदलते हुए मौसम में बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं। डेंगू बुखार के खतरे बढे हुए हैं।वारिस गंज और टांडा में एक दर्जन लोग गंभीर रूप से पीड़ित हैं। अधिकांश मरीजों की प्लेटनेट डाउन हो गई है।
पिछले दो सप्ताह के भीतर पांच लोगों की मौत हो चुकी है। वारिसगंज ग्राम पंचायत टांडा का हिस्सा है। ग्राम पंचायत में छोटे बड़े गांवों की संख्या एक दर्जन के आसपास है।टांडा और वारिस गंज में लोग गंभीर रूप से पीड़ित हैं।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले सप्ताह अस्पताल की टीम ने कैम्प लगाकर जांच की, किसी भी मरीज में डेंगू की पुष्टि नहीं हुई है, फिर बुखार आने और प्लेटनेट डाउन होने के कारण मरीजों के परिजन डेंगू फैलने के खतरे से घबराए हुए हैं। कुछ लोग प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज करा रहे हैं।
ग्राम प्रधान ने बताया कि एक महिला डेंगू से पीड़ित होने के कारण लोहिया अस्पताल लखनऊ में भर्ती थी। रविवार को उसकी मौत हो गई है। इसके पहले चार मरीजों की मौत हो चुकी है।चार दिन पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगदीशपुर की टीम ने तीन दर्जन मरीजों की जांच की थी।टीम ने किसी भी मरीज में डेंगू की पुष्टि नहीं की है।
वारिस गंज और टांडा में जो भी मौतें हुई हैं उनका कारण अनवांटेड ट्रीटमेंट है। झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज के कारण लोगों की हालत खराब हुई है।चार दिन पहले कैम्प लगाकर जांच कराई गई थी। किसी मरीज में डेंगू के लक्षण नहीं मिले। दुबारा टीम भेजकर जांच करायेंगे।





