Sunday, February 22, 2026
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श्रीराम मर्यादा के मार्ग पर चलकर नारियों का करते थे सम्मान : प्रधानाचार्य

सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में विजयदसवीं से पूर्व कार्यक्रम हुआ आयोजित

महोबा। दशहरा पर्व पर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत कालेज के प्रधानाचार्य कमलेश सिंह ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जलित कर किया, इसके बाद छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य कमलेश सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम सबको सोचना चाहिए़ कि ये विजयादशमी का पर्व हम क्यों मनाते हैं और श्रीराम रावण युद्ध के बारे में भी सब जानते है लेकिन रावण की वृत्ति राक्षसी थी और राम की वृत्ति देवों की थी।

उन्होंने बताया कि एक बार जब भगवान राम ने रावण को मारा तब मंदोदरी ने कहा कि ऐसा कौन व्यक्ति है जिसने तीनों लोकों के मालिक रावण को मारा, मैं उससे मिलना चाहती हूं ऐसा सोचकर जब मंदोदरी उनसे मिलने गई तो राम मंदोदरी को देख कर खड़े हो गए। मंदोदरी यह देख कर समझ गई कि जो व्यक्ति महिला का इतना सम्मान जानता है निश्चित ही वह कोई असाधारण व्यक्ति है। कहा कि राम रावण में सिर्फ कर्मों का अंतर था और राम मर्यादा के मार्ग पर चलते थे और नारियों को माता, बहिन का सम्मान देते थे इस कारण राम भगवान कहलाए जबकि रावण अहंकारी, दुष्ट और राक्षसी प्रवृत्ति का था, जिसके मन में नारियों के प्रति सम्मान नहीं था। गणित के प्रवक्ता आदित्य ने बताया कि कृष्ण और राम एक अवतार होने के बाद भी दोनों में एक अंतर है कि राम ने हर चीज पूंछ के की और कृष्ण ने बिना पूंछे लेकिन दोनों ने कार्य अपनी प्रजा और समाज के हित में किए।

कार्यक्रम में अंग्रेजी प्रवक्ता गिरीश ने दशहरा पर्व पर भगवान राम के बताए गए मार्ग पर चलने का सभी लोगों से आहवान किया। कक्षा 12 की छात्रायशस्वी श्रीवास्तव ने बताया कि यह पर्व असत्य पर सत्य की जीत का है क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम अवध बिहारी श्रीराम ने इस दिन लंका के राजा रावण का वध करके असत्य पर सत्य की पताका को फहराया था। बाद छात्र रौनक ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि इस पर्व पर हम सबको भगवान राम से सीख लेने की आवश्यकता है। जैसे भगवान राम ने अपने गुरु और माता पिता की आज्ञा का पालन किया ऐसे ही हमें भी अपने माता पिता और गुरुओं की आज्ञा का पालन करना चाहिए। छात्रा यशस्वी और मोहिनी ने नगरी हो अयोध्या सी रघुकुल सा घराना हो और चरण हो राघव के जहां मेरा ठिकाना हो गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम संचालक जगप्रसाद तिवारी ने किया।

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