Sunday, April 26, 2026
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‘पहले गिरफ्तारी… बाद में जमानत मिल जाती’, मेहुल चोकसी के वकील ने कहा- उन्हें भारत लाना आसान नहीं

भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चौकसी को बेल्जियम में भले ही पकड़ लिया गया हो। मगर उसके वकील का कहना है मेहुल को भारत लाना आसान नहीं है। प्रत्यर्पण संधि के मुताबिक व्यक्ति को पहले गिरफ्तार करना जरूरी होता है। इस मामले में भी वही हुआ है। वकील ने कहा कि अपील दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। याचिका में खराब स्वास्थ्य को मुख्य आधार बनाया जाएगा।

बैंक घोटाले में भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया है। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुरोध पर बेल्जियम पुलिस ने उसके खिलाफ एक्शन लिया है। अब दोनों देशों की एजेंसियां कागजाती कार्रवाई में जुटी हैं। चोकसी को जल्द से जल्द भारत लाने की कोशिश है। इस बीच उसके वकील विजय अग्रवाल ने गिरफ्तारी की खबरों पर प्रतिक्रिया दी।

अपील दायर करने की तैयारी में चोकसी

वकील विजय अग्रवाल ने कहा, “मेरे मुवक्किल मेहुल चोकसी को बेल्जियम में गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल वह हिरासत में है। हम इसके खिलाफ अपील दायर करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। हम अनुरोध करेंगे कि उसे जेल से बाहर निकाला जाए। याचिका का मुख्य आधार उसका खराब स्वास्थ्य है और कैंसर का इलाज होगा।

यह हर देश की कोशिश

गिरफ्तारी पर अग्रवाल ने कहा कि यह हर देश की प्रक्रिया है। चाहे वह भारत हो या कोई अन्य देश। जब कोई भी देश दूसरे देश से अनुरोध करता है तो प्रक्रिया के तहत सबसे पहले व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है। इसके बाद उसे जमानत दी जाती है। बाद में उसके प्रत्यर्पण को चुनौती दी जाती है। उन्होंने कहा कि संजीव भंडारी का केस हारने के बाद भारत के लिए यह बहुत मुश्किल हो गया है। मुझे नहीं लगता कि प्रत्यर्पण इतनी आसानी से हो सकता है।

कोई दबाव नहीं… यह एक प्रक्रिया है

जब उनसे पूछा गया कि भारतीय एजेंसियों ने प्रत्यर्पण का दबाव डाला तो उन्होंने कहा कि कोई दबाव नहीं है। यह एक प्रक्रिया है। 2018 से मेहुल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं। शर्त के मुताबिक प्रत्यर्पण के लिए एक ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट होना चाहिए।

बेल्जियम में चल रहा कैंसर का इलाज

वकील ने कहा कि इससे पहले मेहुल को डोमिनिका से लाने की कोशिश की गई। मगर वहां सफलता नहीं मिली। बाद में डोमिनिकन कोर्ट के आदेश पर मेरे मुवक्किल का इलाज एंटीगुआ में हुआ। बाद में कैंसर के इलाज की खातिर उसे बेल्जियम जाना पड़ा।

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