HomeMarqueeबैल दौड़, बैल सजाओ प्रतियोगिता व किसान सम्मान समारोह का आयोजन आज

बैल दौड़, बैल सजाओ प्रतियोगिता व किसान सम्मान समारोह का आयोजन आज

श्री कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव एवं विकास समिति के तत्वावधान में पोला पर्व आज साेमवार काे धूमधाम से मनाया जाएगा।रायपुर के रावणभाठा मैदान में आज शाम चार बजे से बैल दौड़, बैल सजाओ प्रतियोगिता व किसान सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है।पोला पर्व पर फसल बोने में योगदान देने वाले बैलों को सम्मान देने के लिए किसान अपने बैलों की पूजा-अर्चना करके छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का भोग अर्पित करते हैं। यह पर्व भादो अमावस्या पर मनाया जाता है।

समिति के अध्यक्ष माधवलाल यादव ने बताया कि प्रतियोगिता में किसान अपने बैलों को सजाकर लाएंगे। बैलों की पीठ पर धार्मिक, देशभक्ति से परिपूर्ण झांकी सजाई जाएगी। शहर के बाहर से आने वाले बैल मालिकों को दो हजार रुपये यात्रा भाड़ा दिया जाएगा। प्रतियोगिता में शामिल समस्त बैल जोड़ों के मालिकों को एक-एक हजार रुपये की सांत्वना राशि, स्मृति चिन्ह प्रदान किया जाएगा।

मुख्य अतिथि खेल एवं युवा कल्याण मंत्री टंकराम वर्मा एवं अध्यक्षता ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू करेंगे। पोला महोत्सव पर बच्चों के लिए झूला, खेलकूद का आयोजन किया गया है। महिलाओं के लिए छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार पोरा पटकने की परंपरा निभाई जाएगी।कंस मामा ने अपने भांजे कान्हा को मारने के लिए पोलासुर राक्षस को भेजा था। कान्हा ने भादो अमावस्या के दिन पोलासुर का वध किया था। इसे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में पोला उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर किसान अपने बैलों का सम्मान करने उत्सव मनाते हैं।

महामाया मंदिर के पं.मनोज शुक्ला ने बताया कि इस दिन बच्चियां छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खिलौनों को देवी-देवताओं को अर्पित करने की परंपरा निभाएंगी। ग्रामीण इलाकों में शीतला देवी समेत भैसासुर, ठाकुर देवता, मौली माता, साड़हा देवता, परेतिन दाई, बईगा बाबा, घसिया मसान, चितावर, सतबहिनी,सियार देवता को मिट्टी के बैल चढ़ाने की परंपरा निभाएंगे। अन्न माता का गर्भधारण भादो अमावस्या पर खरीफ फसल के द्वितीय चरण का कार्य (निंदाई) पूरा कर लिया जाता है।

मान्यता है कि इस दिन अन्नमाता यानी फसलों में गर्भधारण होता है, यानी दानों में दूध भरता है। ग्रामीण इलाकों में युवतियां गांव के बाहर मैदान अथवा चौराहों (जहां नंदी बैल या साहड़ा देव की प्रतिमा स्थापित रहती है) पर पोरा पटकने की रस्म निभाएंगी। युवतियां अपने घर से लाए गए एक-एक मिट्टी के खिलौने में कुछ अनाज भरकर पटककर फोड़ेंगी।

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