Monday, April 6, 2026
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हम फिल्मों से अच्छी बाते सीखे और उसे अपने जीवन में क्रियान्वित करे

BRIJENDRA BAHADUR MAURYA 
फ्रेंडशिप डे पर बच्चों ने उठाया बाल फिल्मोत्सव का आनन्द


लखनऊ। राजधानी में अगस्त का पहला रविवार चिनहट स्थित सिद्धान्त वर्ल्ड स्कूल के बच्चों के लिए अनूठा था जहाँ ‘आलोक  श्रीवास्तव मोड्यूल फॉर कल्चरल एक्सीलेंस’ द्वारा प्रथम बाल फिल्मोत्सव बड़ी धूम धाम के साथ आयोजित किया गया। बच्चों ने देश विदेश की पुरस्कृत फिल्मो का आनंद उठाया। इस फिल्मोत्सव का उद्घाटन बेसिक शिक्षा निदेशक सवेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने किया। उन्होंने कहा की फ़िल्में भारतीय लोगो के जीवन में इतनी घुली मिली हैं की उस से इनकार नहीं किया जा सकता। आवश्यकता है की हम फिल्मों से अच्छी बाते सीखे और उसे अपने जीवन में क्रियान्वित करे . इस अवसर पर प्रसिद्ध इरानी निदेशक माजिद मजीदी की फिल्म “ चिल्ड्रेन ऑफ़ हेवेंस “, ऐनी वुड की डाक्यूमेंट्री “ओपन द डोर “  और गीतांजलि राव द्वारा बने गई एनीमेशन  फिल्म “प्रिंटेड रेनबो” का प्रदर्शन किया गया। चिल्ड्रेन ऑफ़ हेवन ऑस्कर के लिए नामित भी हुई थी। फिल्म ईरान के एक गरीब परिवार के दो बच्चों अली और जेहरा को केंद्र में रख कर बने गई है। फिल्म में बेहें का एक जोड़ी जूता भाई अली से खो जाता है। फिर एक जोड़ी जूते से दोनों भाई बेहें अपना काम चलते हैं। फिल्म में जूते के खोने के बाद उपजी परिस्थितियों से ईरानी समाज की विभिन्न परतों का बहुत आत्मीयता और सहेजता के साथ दर्शकों का सामना होता हा. फिल्मोत्सव की दूसरी प्रतुती ऐनी वुड की टी वी कंपनी रैग डॉल की डाक्यूमेंट्री श्रृखला ‘ओपन अ डोर’ थी. यह डाक्यूमेंट्री श्रृंखला ५ – ५ मं की १७ लघु फिल्मों का संकलन है, जिन्हें १७ देशों में निर्मित किया गया है. इन लघु फिल्मों के बहाने देश दुनिया को बच्चों की नज़र से समझना है. ८५ मिनट की इस श्रृंखला को देखते हुए बछूं को कई देशों में गुज़रने जैसा एहसास होता है. हर एपिसोड में ५ मिनट में एक देश की कहानी कही गई है. कहानी कहने का आम तरीक़ा यह है कि दरवाज़ा खुलेगा और बच्चा बाहर निकलेगा और फिर ५ मिनट बाद घर में दाखिल हो जाएगा. इस ०५ मिनट के दौरान बच्चे की गतिविधियों को कैमरा क़ैद करेगा, उदाहरण के लिए  ओपन अ डोर इन मंगोलिआ  की कहानी विशाल घास के मैदान के पास घटती है जहां रह रहे एक बच्चे को पड़ोस में काम कर रहे मज़दूरों द्वारा छोड़ा गया प्लास्टिक का पीला हेलमेट मिलता है, इस वस्तु से उसका परिचय नहीं लेकिन बच्चा कैसे सोचता है यह ०५ मिनट में दिखाया जाता है समारोह की अंतिम प्रस्तुति गीतांजलि राव की एनीमेशन फिल्म “प्रिंटेड रेनबो” थी. इसमें एकाकी जीवन व्यतीत कर रही एक बुज़ुर्ग महिला की फैंटेसी को माचिस के डिब्बों के माध्यम से दिखाया गया है. उक्त अवसर पर लखनऊ शहर की प्रतिष्ठित कलाकारों को सम्मानित भी किया गया जिनमे प्रमुख रूप से आकाशवाणी के श्री प्रतुल जोशी, कथक न्रित्यांगना सुश्री सुरभि टंडन, नत्त्य व फिल्म अभिनेता श्री संगम बहुगुणा शामिल थे. उक्त अवसर पर अस्मेक के निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बच्चों के साथ इंटरैक्टिव सेशन कर उनकी फिल्मो के निर्माण व उस से जुडी विधाओं में रोजगार आदि से सम्बंधित जिज्ञासाओं का समाधान भी किया. आलोक श्रीवास्तव ने बताया की इस तरह के आयोजन इस दृष्टि से किये गए हैं की मद्ध्यम वर्गीय विद्यालयों के बच्चों को भी बड़े अवसरों का लाभ मिले . उक्त अवसर पर फिल्मों में रूचि रखने वाले बच्चे जैपुरिया स्कूल, सेंट स्टीफ़न स्कूल, एस डी एस एन स्कूल सहित लगभग १० विद्यालयों के प्रधानाचार्य व १५० बच्चों ने भाग लिया

https://www.youtube.com/watch?v=j3zpe5yTHd4&t=3s


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