इंस्पेक्टर से बनी राइटर ‘’अंजना सिंह’’ एक प्रेरणा
– भविष्य में साहित्य जगत को कुछ अच्छा देना चाहती हैं लेखिका
– साहित्य प्रेम के चलते दिया सरकारी नौकरी से त्यागपत्र

कानपुर महानगर। सामाजिक जीवन में बहुत ही कम लोग ऐसे होते हैं जो अपने सपनों को अंजाम दे पाते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि हमारे मन को प्रिय कोई और काम होता है लेकिन हम करते कोई दूसरा काम ही हैं, लेकिन समाज हमेशा ऐसे लोगों को ही सलाम करता है जो अपने मन के काम को एक मुकाम तक ले जाते हैं। ऐसा ही कुछ किया है उत्तर प्रदेश की धरती में अद्भुत रचनाओं को अंजाम दे रही लेखिका डॉ0 अंजना सिंह सेंगर ने। वैसे तो डॉ0 अंजना भारत सरकार के कस्टम विभाग में अधिकारी पद पर कार्यरत रही हैं लेकिन अपने मन के काम अर्थात् साहित्य प्रेम के चलते उन्होंने इस शानदार नौकरी से इस्तीफा दे दिया। जोकि उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति और साहित्य प्रेम का उत्कृष्ट परिणाम हैं। नौकरी से त्याग पत्र देने के बाद डॉ0 अंजना ने अपना सारा ध्यान लेखन में लगाया और परिणाम स्वरूप एक वर्ष में ही अपना पहला काव्य संग्रह मन के पंख का प्रकाशन कर साहित्य प्रेमियों को एक अलग ही काव्य आनंद की भेंट कर समाज में प्रेरणा स्रोत बनी। तो आइए आज अवधनामा के माध्यम से आप का परिचिय कराते हैं आधुनिक युग में ह्रदय स्पर्शी काव्य रचना करने वाली, संस्कृति और परम्पराओं से परिपूर्ण सरल स्वभाव की उभरती हुयी कवयित्री डॉ0 अंजना सिंह से——–
सवाल – आप का जन्म कब और कहां हुआ ?
जवाब – मेरा जन्म ग्राम लिटावली, ज़िला-जालौन (उत्तर प्रदेश) में हुआ।
सवाल – आप के माता -पिता कौन हैं और वे क्या करते थे उस समय ?
जवाब – मेरे पिता जी का नाम श्री एम. एस. सेंगर है और माता का वेद सेंगर। पिता जी सेना में थे। अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं और माता जी गृहिणी हैं।
सवाल – क्या आप को याद है कि आप ने प्रथम लेखन कब किया था ?
जवाब – सृजन, संतान की तरह होता है। जिस तरह हम अपने बच्चों की जन्मतिथि याद रखते हैं, उसी प्रकार यह भी याद रहता है कि अमुक रचना कब लिखी थी। पहली कविता तो ठीक उसी तरह याद रहती है, जैसे पहला प्यार। मैंने पहली कविता तब लिखी थी, जब चौथी क्लास में थी। सन 1980 में।
सवाल – किस से प्रेरित हो कर आप ने पहली बार लिखा और क्या लिखा था ?
जवाब – मेरे नाना जी देश -भक्त और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। वे मुझे अक्सर देश -समाज की नेक बातें बताया करते थे। उन्हीं से प्रेरित हो कर मैंने एक बाल -कविता लिखी थी। देखें कि क्या लिखा था —-
‘नाना यदि मैं कोयल होती, सबको मीठे गीत सुनाती,
सच कहती यदि दीपक होती, अंधियारे को दूर भगाती।
सवाल- आप के लिए साहित्य क्या है ?
जवाब- मेरे लिए साहित्य मेरे दिल की धड़कन है। साहित्य नहीं तो मैं नहीं। यह मेरे लिए साधना है, पूजा है।
सवाल- आप ने लेखन को व्यवस्थित रूप कब से प्रदान किया ?
जवाब- ज्यादा समय नहीं हुआ। 2017 में पहले का लिखा हुआ एकत्र किया और निरंतर लिखना आरंभ किया।
सवाल- जब आप को विद्यार्थी जीवन से साहित्य से इतनी रुचि रही है तो आप ने उस समय से क्यों नहीं इसमें उड़ान भरी ?
जवाब – तब मैंने अपना कॅरियर बनाना उचित समझा। प्रतियोगी परीक्षा पास की और नौकरी की, पारिवारिक दायित्व निभाया। जब सब कुछ ठीक हो गया, तब साहित्य के लिए समर्पित हुई।
सवाल- आप का लेखन जीवन के किस-किस दौर से गुजरा है ?
जवाब- कई दौर से गुजरा। बचपन में लिखा और जब कुछ बड़ी हुई तो पढ़ने में मन लगाया। कॉलेज के दौर में एक प्रेम- विषयक कविता लिखी-‘तुम सपने में क्यों आते हो ?’ इसके बाद ठाना कि कुछ बनना है, जीवन में कुछ करना है। भविष्य बनाने की चिंता और तन्मयता में लेखन पीछे छूट गया। नौकरी लगने के बाद 1992 में हिंदी दिवस के अवसर पर फिर शुरू हुआ। इसके बाद पुनः सिलसिला चल पड़ा। इसके बाद विवाह होने पर फिर लेखन बंद हुआ। ऐसा लगा कि छूट ही जाएगा, क्योंकि जिम्मेदारियां बढ़ गई थीं, लेकिन मेरे जीवनसाथी श्री सी. बी. सिंह ने हर कदम पर ने मेरा हौसला बढ़ाया। लेखन को संजीवनी मिल गई और मैं देश, समाज की विसंगतियों और मानवीय संवेदनाओं पर भी लिखने लगी।
सवाल- आप को साहित्य के किन रसों में लिखना अधिक पसंद है और आप का पसंदीदा रस कौन सा है ?
जवाब- मुझे श्रृंगार और वीर रस में लिखना अधिक पसंद है। शांत रस में भी कुछ भक्तिमय रचनाएं की हैं। पसंदीदा रस श्रृंगार है।
सवाल- आप को सर्वाधिक कौन से कवि पसंद रहे और क्यों ?
जवाब- मुझे निराला सर्वाधिक पसंद हैं। घोर विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने उत्कृष्ट सृजन किया। जवानी में पत्नी वियोग। कुछ साल बाद पुत्री का भी निधन हो गया। इसके बाद भी वे टूट कर बिखरे नहीं, तभी तो उन्हें ‘ महा प्राण’ कहा गया।
सवाल- आप की नज़र में आज के दौर में लेखन से कौन सी विधा पीछे छूटती जा रही है ?
जवाब- मंचीय नाट्य-लेखन कम हो रहा है आज के दौर में। सिनेमा और धारावाहिकों की बाढ़ के कारण नाट्य -विधा पीछे छूटती जा रही है।
सवाल- आप के जीवन का पहला काव्य पाठ कब और कहां हुआ ?
जवाब- मेरा पहला काव्य पाठ विद्यार्थी जीवन में इलाहाबाद में हुआ।
सवाल- अभी तक का कोई यादगार काव्य पाठ आप का ?
जवाब- पिछले साल 2017 में मुंबई में हुआ। 27 सितम्बर को कार्यक्रम आयोजित हुआ था। तब मुझे ‘सारस्वत सम्मान’ भी दिया गया था।
सवाल– आप भारत सरकार के कस्टम विभाग में आप कार्यरत रही हैं, लेकिन समय से पहले ही त्यागपत्र दे दिया, आखिर ऐसा किन कारणों से किया आप ने ?
जवाब- घर -परिवार और नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ लेखन नहीं हो पा रहा था, अपने साहित्य प्रेम के चलते नौकरी से त्यागपत्र देना उचित समझा।
सवाल- आप के जीवनसाथी एक प्रशासनिक अधिकारी हैं। उनके क्या विचार रहते हैं आप की काव्य रुचि को लेकर ?
जवाब- मेरे पति प्रगतिशील विचार के हैं। वे मेरी काव्य रुचि का पूरा ख्याल रखते हैं। उसे पुष्पित -पल्लवित कर रहे हैं।
सवाल- आज का भारत युवाओं का भारत है तो युवाओं के लिए अपने काव्य विचार किस प्रकार के हैं ?
जवाब- युवा किसी भी समाज और देश की रीढ़ होता है। मैंने युवाओं के लिए प्रेरणास्पद रचनाएं लिखी हैं। युवक- युवतियां अपनी शक्ति का उपयोग रचनात्मक कार्यो में करें। उन्हें भरपूर रोजगार मुहैया कराया जाना चाहिए।
सवाल – अपनी कोई ऐसी रचना बताएं, जो आप को सर्वाधिक पसंद है और क्यों है ?
जवाब – किसे बता दूं ? अपनी हर संतान प्रिय होती है। फिर भी आप ने पूछा तो बता रही हूं। मुझे अपनी सरस्वती वंदना बेहद पसंद है। बड़ी मेहनत से वंदना तैयार हुई और जब मैं ने इसे पूरा पढ़ा तो बड़ी तृप्ति मिली। लगा कि सब कुछ शारदा ने लिखा दिया। अत्यधिक श्रम और श्रद्धा से यह रचना बनी, इसलिए बहुत प्रिय है।
सवाल- आप के काव्य संग्रह ‘मन के पंख’ को पढ़ा कर मालूम पड़ता है कि आप को साहित्य की कई विधाओं में ज्ञान हासिल है —ऐसा कैसे संभव हुआ ?
जवाब- यह मेरे काव्य -गुरु की कृपा से संभव हुआ। उन्होंने मुझे छंदों का ज्ञान कराया। मैंने बड़ी तन्मयता से उनसे सीखने की कोशिश की। सीखने का क्रम लगातार जारी है।
सवाल- आप के काव्य -गुरु कौन हैं और कैसे आप उन के संपर्क में आईं ?
जवाब- मेरे काव्य – गुरु आदरणीय राजकुमार धर द्विवेदी जी हैं, जो कवि -लेखक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। सोशल मीडिया के जरिए मैं आप के संपर्क में आई।
सवाल- आप के प्रथम काव्य संग्रह का नाम ‘मन के पंख’ है, आखिर यही नाम क्यों रखा आप ने ?
जवाब- यह प्रतीकात्मक नाम है। मन की उड़ान अति तीव्र होती है। मन पलभर में कहीं से कहीं पहुंच जाता है। कवि का मन ही तो है, जो पंख लगा कर उड़ान भरता है कल्पना -लोक में। कहते भी हैं – जहां न पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि। बस मैंने यही सोच कर संग्रह का नाम ‘मन के पंख’ रख दिया।
सवाल- उस समय कैसा लगता है, जब आप कुछ लिखना चाहें और लिख न सकें। क्या हालत होती है मन की तब ?
जवाब- बड़ी बेचैनी होती है। किसी अन्य काम में मन नहीं लगता, जब तक मन की बात लिख न लूं।
सवाल- भविष्य की क्या योजनाएं हैं आप की साहित्य जगत को ले कर ?
जवाब- भविष्य में संस्मरण, लेख और कहानियां लिखने का मन है। कुछ ऐसे महापुरुषों पर खंडकाव्य और उपन्यास लिखने का मन है, जिन्हें कम लोग जानते हैं। साहित्य जगत को कुछ अच्छा देना चाहती हूं।
सवाल- अब तक कितने पुरस्कारों से नवाजा गया है आप को और सर्वाधिक खुशी किसमें मिली व पहला कौन सा है ?
जवाब- पहला पुरस्कार ‘साम्यवाद को श्रद्धांजलि’ कविता पर मिला था। उसे पा कर बेहद खुशी हुई थी। मुंबई में सारस्वत सम्मान मिला। कुछ माह पहले आजमगढ़ में ‘कलाश्री ‘ सम्मान मिला।
सवाल- आप एजूकेशन फाउंडेशन की चेयरपर्सन होने के साथ ही विभिन्न पारिवारिक भूमिकाओं में हैं। अपने लेखन के साथ आप इन सबके साथ कैसे सामंजस्य बैठा पाती हैं ?
जवाब- लेखन के लिए वाकई समय कम मिलता है, लेकिन यात्रा के दौरान कार में, एयरपोर्ट में, विमान में मैं लिख लेती हूं।
सवाल- आप इतनी ऊर्जा कहां से लाती हैं ?
जवाब- ऊर्जा विद्या की देवी माता सरस्वती देती हैं। सच कहूं तो सृजन उन्हीं की कृपा से होता है। इसके साथी ही उत्साहवर्धन से भी ऊर्जा मिलती है।
सवाल – साहित्यिक सम्मेलनों और गोष्ठियों के बारे में आप के क्या विचार हैं ?
जवाब – आजकल मनोरंजन के कई साधन हैं, इसलिए साहित्यिक सम्मेलन और गोष्ठियां कम होती हैं। आदमी का जीवन भी काफी व्यस्त हो गया है। फिर भी साहित्य- प्रेमी लोग कुछ न कुछ करते रहते हैं। मैं यहां यह जरूर कहना चाहूंगी कि कवि सम्मेलनों में हल्कापन नहीं होना चाहिए। अक्सर हास्य के नाम पर चुटकुले सुना दिए जाते हैं, फूहड़ कविता परोस दी जाती हैं। यह हिंदी कविता और मंचों के लिए ठीक नहीं है। आज के दौर में तमाम गुटबाजी भी देखने को मिलती है। शारदा के पुत्र तमाम गुटों में बंटे हुए हैं। ऐसे में सृजन गौण होता जा रहा है।
सवाल – आने वाले संग्रह का क्या नाम है? और इसमें किस प्रकार की रचनाओं को संगृहीत किया गया है ?
जवाब – आने वाला काव्य-संग्रह – ‘जुगनू की जंग’ जो तैयार हो चुका है। जल्दी ही इसका प्रकाशन होगा। इस में सभी रस की रचनाएं हैं। उत्सुकता बनाए रखें। जल्दी इसे आपको और तमाम पाठकों को भेंट करूंगी।
सवाल – क्या कहना चाहेंगी साहित्य प्रेमियों के लिए ?
जवाब – साहित्य प्रेमियों से यही कहना चाहूंगी कि वे अच्छा साहित्य पढ़ें और समाज व देश के हित में लिखें, मानवीय गुणों में वृद्धि करने वाला लेखन करें। लेखन को सरस्वती की पूजा मानें।
सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट





