नाले में डाली जा रहा कूडा, कैसे साफ होंगी गंगा
सफाईकर्मचारी नाले के पास कर रहे कूडा डंप, मौका देखकर गिरा देते है नाले में कूडा

कानपुर महानगर। भाजपा की सरकार और देश के प्रधानमंत्री गंगा को साफ तथा निर्मल बनाने का प्रयास कर रहे है लेकिन कानपुर नगर में अधिकारी और कर्मचारी इस ओर लगातार लापरवाही बरत रहे है। गंगा सफाई के लिए शहर में कार्य तो किया जा रहा है लेकिन यह सफल कितना होगा कहा नही जा सकता है। सैकडो नालियां व छोटे नाले गंगा में लगातार दूषित जल गिरा रहे है। इतना ही नही सफाई कर्मचारी बडे नालों मेें गंदगी डाल रहे है, ऐसे में गंगा सफाई और उसकी निर्मलता कैसे होगी यह सपना जैसा ही प्रतीत होता है।
खलासी लाइन, ग्वालटोली क्षेत्र में शहर का मुख्य सीसामऊ नाला निकलता है जो सीधा गंगा में गिरता है। गंगा सफाई अभियान में हलांकि इस नाले को टेप किया जायेगा लेकिन वर्तमान में नाले का पानी गंगा में ही जा रहा है। विभागीय लापरवाही के कारण नाले में सीधा गंदगी फेंकी जा रही है और इस काम को सफाईकर्मी अंजाम दे रहे है। नाले के पास में कूडा डंप कर दिया जाता है फिर सफाईकर्मी पूरे कूडे को नाले मे गिरा देते है। हर वर्ष बरसात के पहले नाले से सिल्ट निकाली जाती है, उसमें भी लापरवाही बरती जाती है। नाले से पूरी तरह सिल्ट न निकलने से बरसात में नाला उफान पर होता है और ग्वालटोली अहिराना 480 तथा खलासीलाइन के क्षेत्र में पानी भर जाता है।गंगा में गंदगी व नाले गिरने पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी ने आदेश दिया था कि नाले व गंदगी गंगा में गिरती मिली तो सख्त कार्यवाही की जायेगी। वर्तमान समय में 21 बडे नालो से दूषित जल गंगा में गिर रहा है। वर्तमान में 21 बडे नालो में सीसामऊ नाले सहित अन्य 6 नालो को बंद करने का काम भी किया जा रहा है। वहीं कुछ दिन पहले नमामि गंगे के कामो की समीक्षा करने आये केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री ने सीसामऊ नाला अक्टूबर तक बंद करने के आदेश दिये थे।
दर्जनो अवैध बस्तियों का गंदा पानी गंगा में
कानपुर के घाटो के पास दर्जनो ऐसी अवैध बस्तियां है जिनसे हजारो लीटर गंदा पानी निकलकर सीधा गंगा में गिर रहा है। रानीघाट, भैरोघाट, परमट, सरसैया घाट, कालीघाट, बाबा घाट, बंगाली घाट, भगवतदास घाट, गोलाघाट, मैस्कर घाट, मनोहर नगर, बुडिया घाट, सिद्धनाथ घाट तथा जाजमऊ जैसे गंगा बैराज से जाजमऊ तक 12 किमी0 के क्षेत्र में गंगा किनारे दर्जनो बस्तियां बसी है। आंकडो को देखा जाये तो रोजाना इन बस्तियो से पांच करोड लीटर गंदा पानी सीवर पाइप के जरिये गंगा में गिरता है, इसका लेखा जोखा नही है।
गंगा में बढा काला पानी
कानपुर में गंगा ज्यादा दूषित हो रही है। शहर के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक हजारो नाले नाली गंगा में दूषित जल गिरा रहे है तो वहीं केमिकल व अन्य खतरनाक रासायनिक पदार्थ भी गंगा के पानी में मिल रहे है। अप्रैल माह चल रहा है और गर्मी भी बढने लगती है। आने वाले मई और जून में भीषण गर्मी होगी लेकिन अभी से गंगा का जलस्तर कम होने के साथ साथ काला पानी भी तेजी से बढने लगा है। वहीं जलकल को लगभग 11 सौ कि0ली0 क्लोरीन पानी को क्लीन करने में खर्च करना पड रहा है। जहां गंगा का पानी 40हैजेन से उपर पहुंच चुका है तो वहीं नाईट्राईड भी .02 आ रहा है। पानी को शुद्ध करने के लिए तथा गंदगी हटाने के लिए पहले की अपेक्षा दो गुना फिटकरी भी खर्च की जा रही है। गिरते जलस्तर के कारण जलकल विभाग चिन्तित है ऐसे में भीषण गर्मी में गंगा के जलस्तर में और गिरावट होगी। जलकल विभाग द्वारा इस समस्या से निपटने की तैयारी की जा रही है।

सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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