BRIJENDRA BAHADUR MAURYA
न्यूनतम मजदूरी 25 हजार रुपए महीना की जाए : इन्टक
राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस का 31वां प्रांतीय सम्मेलन संपन्न हुआ

लखनऊ। राजधानी में राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इन्टक) का 31 वें प्रांतीय सम्मेलन रविवार को आयोजित किया गया, जिसमें इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद डॉक्टर जी संजीवा रेड्डी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई, इंटक के राष्ट्रीय सचिव व केंद्रीय प्रवेक्षक राकेश्वर पांडेय, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह आदि गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
राष्ट्रपिता महात्मा गाॅधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू एवं सरदार बल्लभ भाई पटेल के मार्ग दर्शन एवं प्रेरणा से राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस की स्थापना 03 मई 1947 को हुई। समाज सेवा, गरीबों के हक के लिये संघर्ष करना, असंगठित तथा संगठित वर्ग के कर्मचारियों को न्याय दिलाना तथा राष्ट्र की समृद्धि के लिये श्रमिकों को उत्पादकता के लिये निष्ठापूर्वक कार्य के लिये प्रेरित करना इण्टक का उद्देष्य रहा है।
इण्टक सदेैव ही उद्योग एवं उद्योगों में नियोजित कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिये प्रयत्नशील रहा है।
इंटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की बागडोर एक योगी के हाथ में है और हम उम्मीद करते हैं कि एक योगी प्रदेश के कर्मयोगियों के हित का सदैव ध्यान रखेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इन्टक) भारत का एक प्रमुख श्रम महासंघ है। इन्टक परम्परागत रूप से श्रमिकों के हित को सुनिष्चित करने के लिये स्थापित किया गया। श्रम हित में भारत सरकार द्वारा किये गये प्रयासों की सराहना करते हुये इन्टक श्रम जगत से जुडे कुछ विषयों की ओर भारत सरकर का ध्यान आकृष्ट करना चाहता है।
देश के सभी ट्रेड यूनियन संगठनों द्वारा प्रस्तुत मांगें जिसमें न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, समान कार्य के लिये समान वेतन, आदि मुद्दों पर सरकार ने कोई ठोस व सकारात्मक पहल नहीं किया है। इन्टक अपने 31 वें सम्मेलन के माध्यम से केन्द्र व प्रदेष सरकार से निम्न प्रमुख मांगों के सम्बन्ध में अपना प्रस्ताव प्रस्तुत करता है:-
1- प्रायः समस्त प्रकार की दैनिक वस्तुओं के दाम निरन्तर बढ़ते जा रहे हैं। इससे जन सामान्य विषेशकर दैनिक मजदूरी करने वाले कामगारों को अपने परिवार के भरण पोषण में आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पडता है। इंटक यह मांग करती है कि दिनाें दिन बढती मंहगाई पर सरकार जल्द रोक लगाये जिससे जन सामान्य को राहत मिल सके।
2- श्रम कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाये। 45 दिनों की अवधि के भीतर श्रम संघों का अनिवार्य पंजीकरण व आईएलओ कन्वेंशन 87-98 का तत्काल अनुसमर्थन।
3- संगठित और असंगठित श्रमिकों के लिये सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवर व राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षाकोश का निर्माण किया जाये। 4- केन्द्रीय और राज्य सरकारी उपक्रमों में विनिवेश पर रोक तथा ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर ठेके पर कार्य कर रहे श्रमिकों को स्थायी श्रमिकों की दर से मजदूरी भुगतान।
5- सभी क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी 25000 रूपये से कम न हो।
6- रोजगार सृजन के लिये ठोस कदम उठाये जायें। केन्द्र व राज्य सरकार के रिक्त पदों पर कार्यरत संविदा कर्मियों को समायोजित किया जाये।
7- औद्योगिक हित के विपरीत किसी भी रोजगार नीति का इंटक विरोध करता है। इंटक की मांग करता है कि ऐसी राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाई जाये जो रोजगार के प्रति संवेदनशील हो और जिसके एजेंडे में रोजगार सृजन शीर्ष पर हो।
8- उत्तर प्रदेश में बन्द पडी चीनी, कपडा, बुनाई, इन्जीनियरिंग आदि की सभी मिलों को पुनर्जीवित किया जाये। इन्टक यह मांग करता है कि प्रदेश की चीनी तथा टेक्सटाइल उद्योग भदोही का कारपेट उद्योग, अलीगढ़ का ताला उद्योग बनारस का साडी उद्योग, फिरोजाबाद का कांच उद्योग, आगरा का चर्म उद्योग, मुरादाबाद का पीतल उद्योग आदि का नई तकनीक अपनाकर पुनरूद्धार किया जाये, जिससे इन उद्योगों में कार्यरत लाखों श्रमिक लाभान्वित हो सकेंगे।
9- सूचना के अधिकार की भाॅति हर युवा को कार्य का अधिकार तथा हर वृद्ध को पेंशन का अधिकार दिया जाये। ऐसा करने से गरीबी तथा बेरोजागरी की दोहरी समस्या का हल हो सकेगा।
10- प्रबन्धन मे श्रमिकों की सहभागिता का इन्टक समर्थन करता है।
11- राष्ट्रीय न्यनतम वेतन नीति तथा चीनी उद्योग के लिये राष्ट्रीय मजदूरी नीति बनाई जाये।
12- समान कार्य के लिये समान वेतन के सिद्धान्त पर अमल किया जाये। जस्टिस जेएस केहर और जस्टिस एसए बोबडे की पीठ ने अपने फैसले में यह कहा है कि समान कार्य के लिये समान वेतन के तहत हर कर्मचारी का अधिकार है कि वो नियमित कर्मचारी के बराबर कार्य के लिये उसके बराबर वेतन पाये। इंटक मांग करता है कि समान कार्य के लिये समान वेतन के सिद्धान्त को सख्ती से लागू किया जाये।
इन्टक अपने 31वें सम्मेलन के माध्यम से सरकार से यह मांग करता है कि राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत उक्त श्रमिक हिती मांगों पर सरकार ध्यान दे और ठोस व सकारात्मक समाधान कर श्रमिकों को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करे।
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