गुनाहगारों को बचाने में पुलिस का खेल, निर्दोषों को भेजना चाहती है जेल
– जिला औरैया के सहायल थाना क्षेत्र का मामला
– षडयंत्र रचकर लिखवाये गये फर्जी मुकदमों में खेल कर रही थाना पुलिस
– पुरानी रंजिश के तहत एक और फर्जी मुकदमें पत्रकार परिवार को फंसा रहा दलित परिवार
– संदिग्ध मौत को हत्या का रूप दे रहे मृतक के परिजन, जबकि हत्या से पहले मृतक के साथ रिस्तेदार गायब
– बिना जाँच पड़ताल पुलिस बनी मजिस्ट्रेट, पत्रकार परिवार को कर रही तरह तरह से टार्चर

औरैया दिबियापुर। सहार ब्लाक के ग्राम पूर्वादुजा के एक सम्भ्रांत परिवार को किसी गरीब की मदद करना उसके लिये ही हानिकारक बन गया। दरअसल इस ब्राम्हण परिवार ने गाँव के ही एक दलित परिवार को अपनी पुस्तैनी खेती बटाई पर दे दी। कुछ दिन बाद हुई खेत मालिक और दलित बटाईदार के बीच अनबन ऐसी रार का कारण बनी कि आज खेत मालिक के परिवार पर कई फर्जी मुकदमें लिख गये। और संबंधित थाना पुलिस बिना जाँच पड़ताल मजिस्ट्रेटी अंदाज में पीड़ित पत्रकार परिवार को ही प्रताड़ित करने में जुट गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार औरैया के ग्राम पूर्वादुजा निवासी अंकुर चतुर्वेदी उर्फ रामजी पेशे से पत्रकार हैं जो वर्षों से कानपुर में रहकर रामजी के पिता सर्वेश चतुर्वेदी ने गाँव के ही रामकेश को अपनी खेती बटाई पर दी थी। कुछ दिनों तक रामकेश ने खेती का कार्य कुशलता पूर्वक किया। लेकिन समय बीतते-बीतते रामकेश द्वारा खेतों में पैदावार हुई फसल में हेराफेरी और कई तरह की खेत मालिक से होने वाली रोज-रोज नोकझोंक से किनारा करते हुये पत्रकार रामजी चतुर्वेदी के पिता ने बटाईदार रामकेश से खेती वापस ले ली। और बटाईदारी खत्म कर ली। रामकेश और उनका परिवार तब से पत्रकार परिवार से खुन्नस मानने लगा। इसी खुन्नस के तहत रामकेश अक्सर इस ब्राह्मण परिवार को धमकी देता रहा कि हम दलित हैं और तुम्हारे ऊपर हरिजन एक्ट लगवाकर जेल न भिजवाया तब तक चैन नहीं लेंगे। इसमें रामकेश के रिश्तेदारों में उसका साढ़ू साथ देता था। जिसकी शिकायत पत्रकार परिवार ने आई.जी.आर.एस. द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर की थी। तब इस प्रकरण पर सीओ बिधूना ने रामकेश और पत्रकार परिवार के बीच समझौता करवा दिया था। इसके बावजूद भी कुछ दिन बाद पता चला कि रामकेश ने कोर्ट का सहारा लेकर पत्रकार परिवार पर छेड़छाड़ और हरिजन एक्ट का फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया। आरोप है कि रामकेश और उसके रिस्तेदार साढ़ू ने इस मुकदमें में समझौते के नाम पर कुछ अमाउंट की डिमांड की थी। इसी बीच विगत 23 मार्च को रामकेश अपने साढ़ू के साथ निकला और 24 मार्च को सुबह उसका शव सहायल थाना क्षेत्र में एक खेत में भट्ठे के पास पाया गया। कई क्षेत्र वासियों ने नाम न छापने की तर्ज पर बताया कि रामकेश और उसके साढ़ू व अन्य दोस्तों ने उस रात खूब शराब पी और आपस में लड़ाई झगड़ा हुआ। इस बीच न जाने कहाँ और क्या हुआ कि रामकेश की मृत्यु हो गई। तब से मृतक रामकेश के साथ उस रात शराब पीने वाले साथी और उसको 23 मार्च की शाम घर से लेकर निकले साढ़ू तब से गायब हैं। लेकिन साजिशन पहले से पत्रकार परिवार से रंजिश मान रहे दलित परिवार ने पत्रकार परिवार पर हत्या का मुकदमा लिखवा दिया। जबकि मुकदमें में लिखवाये गये नामों में कई लोग उस क्षेत्र में थे ही नहीं। जानकार बताते हैं कि मृतक रामकेश के गायब साढ़ू और साथियों को पुलिस टारगेट करे तो हत्या का पर्दाफाश होने में टाइम नहीं लगेगा।
– घटना में कई अनसुलझे सवाल दे रहे फर्जी मुकदमें की गवाही
– यह कि मृतक रामकेश के परिजनों की तरफ से दी गई तहरीर में मृतक की लड़की ने कहा है कि पत्रकार रामजी चतुर्वेदी चार पहिया वाहन से आये और मेरे पिता का अपहरण कर ले गये|
– जबकि पत्रकार रामजी चतुर्वेदी बताये गये घटना के समय पर औरैया में नहीं अपने समाचारपत्र कानपुर के कार्यालय और कानपुर प्रेसक्लब में थे|
– अगर मृतक की लड़की ने पत्रकार रामजी को पिता का अपहरण करते देखा तो फिर उसने या परिजनों ने डायल 100 पर सूचना क्यों नहीं दी? या संबंधित थाने में शिकायत क्यों नहीं की?
– मृतक परिजनों ने घटना को अपहरण का नाम दिया जिसमें समय सायं 5 बजे बताया गया, जबकि क्षेत्रवासी बताते हैं मृतक रामकेश अपने साढ़ू के साथ उसी रात पास के ही गाँव में रात 11 बजे तक बम्पर नशे में देखा गया|
– थोड़ी देर के लिये मान भी लिया जाय कि घटना हकीकत है तो फिर इस शव बरामद के बाद ही फर्जी मुकदमें में फंसाये गये पत्रकार परिवार से मृतक के रिश्तेदारों द्वारा समझौते के नाम पर मोटी रकम की डिमांड क्यों की गई?
– प्रथम दृष्टया साबित होता है कि मृतक परिवार द्वारा लिखाये गये इस फर्जी मुकदमें की बुनियाद में छेद ही छेद|

सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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