है अगर दुश्मन जमाना गम नहीं, कोई आये हम किसी से कम नहीं: संजय शर्मा
– इलेक्ट्रॉनिक की दुनियाॅ में शहर में हासिल किया खुदका मकाम
– बिना संपदा के स्वयं की मेहनत से किया खुदको स्थापित
– हर मुश्किल को दिया मुंहतोड़ जवाब
– खुद की मेंहनत पर था भरोसा, कर दिखाया साबित
– सही समय पर सही सर्विस से बनायी ग्राहकों के दिल में जगह

कानपुर महानगर। नामुमकिन को भी मुमकिन बनाने वालों को कोई भी परेशानी आ जाये वो हर परेशानी से खुदको उबार कर अपने मुकाम तक पहुँच ही जाते हैं। ऐसी ही कहानी है “वी0 एस0 इन्टरप्राइजेज” के मालिक संजय शर्मा की। इलेक्ट्रॉनिक मार्केट में खुद को स्थापित कर चुके संजय शर्मा का मानना है कि किसी भी बिजनेस को सिर्फ पैसे के दम पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। बल्कि उसके लिये अच्छा आइडिया और कुछ कर गुजरने का जोश होना बहुत जरुरी है। ईश्वर भी उन्हीं लोगों का साथ देता है जो अपने लिये खुद कोई ठोस कदम उठाने का जज्बा रखते हों। संजय शर्मा एक मध्यम वर्गीय परिवार में पले बड़े हुये हैं। बचपन से ही उनका मन आकाश की बुलंदियों तक पहुँचने का था। जिसके लिये उनके मन में अनगिनत ख्याल आते-जाते थे। लेकिन कहते हैं ना जब भी कोई व्यक्ति कुछ अलग करना चाहता है तो उसके रास्तों पर काँटे बिछानें वाले पहले ही आकर खड़े हो जाते हैं। जब अपनी शिक्षा को समाप्त करके संजय शर्मा ने अपने भविष्य के सपने सँजोनें शुरु किये तो उनको भी कहाँ पता था कि अनगिनत परेशानियाँ मुँह बाये उनका इन्तजार कर रही हैं। लेकिन “हिम्मते मर्दा तो मददते खुदा” के तर्ज पर उन्होने सबकुछ भाग्य के भरोसे ना छोंड़कर स्वयं के दिमाग और अपनी मेहनत पर भरोसा करना ज्यादा सही समझा और आज उसका ही परिणाम है कि शहर में कुछ ही वक्त पर उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक की दुनियां मे अपना परचम लहरा दिया!
किदवई नगर में संजय शर्मा ने सर्वप्रथम एक छोटी सी दुकान का उद्घाटन किया! और फिर जीजान लगा कर अपने दम पर अकेले ही लोगों के दिलों में जगह बनानी शुरु कर दी। सही इलेक्ट्रॉनिक सामानों के साथ संजय शर्मा ने अच्छी सर्विस देकर लोगों को ना सिर्फ अपनी तरफ खींचा बल्कि दिलों में भी जगह बना ली। आज हालात यह है कि उनके यहाॅ आने वाले ग्राहकों में सिर्फ शहर के ही नहीं बल्कि दूसरे जिलों से भी आने वालों का ताँता लगा रहता है। संजय ने अपने सामानों के साथ सर्विस को सही समय पर प्रदान करने के साथ ही सबको 40 प्रतिशत तक का डिस्काउन्ट भी देना शुरु कर दिया। एक ओर शहर के दूसरे दुकानदार सिर्फ अपनी कमाई पर ध्यान दे रहे थे तो दूसरी तरफ संजय शर्मा अपने ग्राहकों की संतुष्टि का ध्यान दे रहे थे। जब इस बारे में संजय शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बहुत ही शालीनता के साथ मुस्कराते हुये जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ’’देखिये हमारे बुजुर्ग कह कर गये हैं कि ग्राहक भगवान का रुप होता है। अब अगर ग्राहक ही असंतुष्ट होगा तो कैसे चलेगा। इस लिये मेरा सबसे पहले प्रयास होता है कि अपने ग्राहकों को उनकी जरुरत का सामान उपलब्ध कराने के साथ ही सही समय पर उनकी दिक्कतों को समाप्त करना!! इसलिये हमारे यहाँ सर्विस पर खास तौर पर ध्यान दिया जाता है। अब अपने भगवान को भला कौन रुठने दे सकता है’’ संजय शर्मा की इसी शालीनता के आज सभी ग्राहक कायल हैं। जिसके चलते कुछ ही वक्त पर ऐसा भी समय आया जब उनको लगने लगा कि सिर्फ एक ही दुकान जो कि विशाल शोरुम में बदल चुकी थी उससे काम नहीं चलेगा, इसलिये उन्होंने शहर के दूसरे हिस्सों पर भी ध्यान दिया। और निष्कर्ष निकला चार नये शोरुम के रुप में। शहर के दूसरे एरिया के ग्राहकों को उनके नजदीक ही सुविधा देने के उद्देश्य से उन्होंने नये शोरुमों को खोला। संजय शर्मा के अनुसार ’’ सिर्फ किदवई नगर में एक शोरुम होने से शहर के दूसरे हिस्सों से आने वाले लोगों को काफी दिक्कत होती थी। आने को तो सही प्रकार की सर्विस और जरूरत का सही इलेक्ट्रॉनिक सामान मिलने के कारण ग्राहक आता तो था ही पर हर किसी की जुबाँन पर एक बार तो यह बात आती ही थी कि काश! आपकी एक दुकान हमारे क्षेत्र में भी होती तो बेहतर था। जब मैंने कई लोगों को यह कहते सुना तो मुझे भी लगा कि सही है दूर से आने वाले लोगों को परेशानियां तो होती ही होंगी। इस लिये कुछ नये शोरुमों का प्लान बनाया और आखिर में अपने प्लान को फलीभूत भी किया। जिसका नतीजा निकला कि अब शहर के चारों कोनो में हमारे द्वारा दी जाने वाली सुविधा उपलब्ध है’’
संजय शर्मा ने अपनें इलेक्ट्रॉनिक शो रूम में श्लोगन लगा रक्खा है ’’आॅनलाइन से भी सस्ता’’ जिसे वो पूरी तरह से सिद्ध भी कर चुके हैं। सिर्फ जिले भर से ही नहीं बल्कि जिले से बाहर से भी लोगों का आना जाना लगा ही रहता है। आज कई बड़ी कंपनियों की एजेंसियाँ भी हैं। जिसके कारण हर प्रकार का ब्राण्ड उपलब्ध रहता है। वाशिंग मशीन से लेकर फ्रिज तक ही नहीं छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा इलेक्ट्रॉनिक का सामान उनके शोरुम में मौजूद रहता है। ग्राहकों को किसी भी प्रकार के सामान के लिये बाजारों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते हैं। उस पर सोने पर सुहागा यह कि सर्विस भी बहुत ही बेहतरीन प्रदान की जाती है। कुछ भी हो फर्श से अर्श तक का सफर कितना भी कठिन क्यों ना रहा हो पर संजय शर्मा के लिये यह उनकी मेंहनत का ही फल है। जो ईश्वर भी उनके हर कदम में उनके साथ खड़ा रहता है। यकीनन कर्म से किसी भी तरह का भाग्य निर्माण किया जा सकता है। इसको संजय शर्मा ने सिद्ध कर दिया है। आज संजय शर्मा एक नाम मात्र ही नहीं है बल्कि जो अपने बलबूते पर बिना किसी पारिवारिक सहयोग या पैतृक संपदा के आगे बढ़ना चाहते हैं उनके लिये एक आदर्श बन चुके हैं। मेंहनत और ईमानदारी के इस जज्बे को सलाम!
“भाग्य पर भरोसा करके बैठनें वालों के मुकद्दर बना नहीं करते, खुदपर हो भरोसा तो सहसवारे मैदान में गिरा नहीं करते।

सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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