Sunday, August 31, 2025
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योग, जीवन और उसकी प्राण-वायु से जुडी पद्धति : ए.ऍफ़.टी.बार

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योग, जीवन और उसकी प्राण-वायु से जुडी पद्धति : ए.ऍफ़.टी.बार

बार-बेंच ने एक साथ मनाया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस:विजय कुमार पाण्डेय

     अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस सेना कोर्ट में बार-बेंच ने मिलकर आयोजित किया जिसमें सेना कोर्ट के माननीय विभागाध्यक्ष न्यायमूर्ति डी.पी.सिंह एवं एयर-मार्शल अनिल चोपड़ा सहित सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता और कर्मचारी शामिल हुए . प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ श्री बी.एल. बाजपाई ने करीब एक घंटे के इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम पतंजलि के अष्टांग-योग के बारे में सबको बताया और कहा कि यदि व्यक्ति को स्वस्थ एवं प्रसन्न-चित्त जीवन व्यतीत करना है तो इस जीवन शैली को नियमित दिनचर्या के अभिन्न अंग के रूप में अंगीकृत करना होगा उसके बाद उन्होंने विभिन्न प्रकार के आसन कराए जिनमे, मयूरासन, वज्रासन, शवासन, कपालभाती, अनुलोम-विलोम एवं प्राणायाम इत्यादि शामिल थे.         कार्यक्रम के पश्चात  न्यायमूर्ति डी.पी.सिंह ने कहा कि हम योग को जीवन में सहज रूप से स्वीकार करके शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ-जीवन व्यतीत किया जा सकता है और अन्तराष्ट्रीय-जगत में योग की स्वीकार्यता से वर्तमान भौतिकतावादी-युग में खुशहाल जीवन व्यतीत करना सरल बनेगा, आज बार-बेंच के सम्मिलित सहयोग से आयोजित इस योग-शिविर में सांस्कृतिक-कार्यक्रम का भी आयोजन किया यदि बार चाहे तो इस योग-शिविर को साप्ताहिक योग-शिविर में रूपांतरित करके आयोजन कराने में बेंच पूरा सहयोग करेगी.

बार के जनरल सेक्रेटरी विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि योग-शिविर के आयोजन में बेंच के सक्रिय-सहयोग के लिए हम सेना कोर्ट के विभागाध्यक्ष के आभारी हैं, परिवर्तनों के प्रति उनकी समाहारवादी चिंतन-शैली के कारण आज इस शिविर में बार-बेंच एक साथ सम्मिलित हुए. पाण्डेय ने कहा कि योग एक जीवन-शैली है इसे व्यक्तिगत-जीवन में नियमित-दिनचर्या के रूप में शामिल करके सर्वकालिक निरोगी जीवन व्यतीत किया जा सकता है. योग और व्यक्ति के मध्य हमें लकीर खींचने से बचना चाहिए क्योंकि यह जीवन और उसकी प्राण-वायु से जुडी पद्धति है.

पूर्व-जनरल सेक्रेटरी डी.एस.तिवारी ने कहा कि हमारे मनीषियों ने निरोगी काया को प्रथम सुख के रूप स्वीकार किया है भौतिक-सुख तो दुसरे पायदान पर आता है इसलिए, मुफ्त में प्राप्त इस जीवन-पद्धति को सबसे पहले अपनाना चाहिए. आर. चन्द्रा इसे स्वस्थ-जीवन की जीवन रेखा मानते हैं, प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ सुनील शर्मा न्र कहा कि जब तक व्यक्ति की भौतिक, शारीरिक एवं मानसिक उन्नति समान रूप से नहीं होती तब तक स्वस्थ सामाजिक-संरचना का उद्भव मुश्किल है और आज इस आयोजन के लिए हम बेंच का आभार प्रकट करते हैं और भविष्य में अपेक्षा रखते हैं.

शिविर में अधिकरण की तरफ से रजिस्ट्रार  सहित अन्य  लोग शामिल हुए और बार की तरफ से अध्यक्ष डा. चेत नारायण सिंह, राजीव पाण्डेय डा. ज्ञान सिंह, पंकज कुमार शुक्ला, आशीष कुमार सिंह,  वी.पी.पाण्डेय, डी.के.पाण्डेय  आशीष कुमार सिंह, सूर्य भान सिंह,जे.एन.राय एवं आर.एन.त्रिपाठी इत्यादि अधिवक्ता शामिल हुए.

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