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पत्रकारों को पेशाब पिलाने की बात करने वाले थानेदार का काला कारनामा

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पत्रकारों को पेशाब पिलाने की बात करने वाले थानेदार का काला कारनामा
थानेदार से होटल में आयोजित पार्टी का बिल मांगना महंगा पड़ा व्यवसाई को
महराजगंज के होटल व्यवसाई दिलीप शुक्ला को उनकी बेटी के जन्मदिन पर जामकर पीटा गया
गोरखपुर। वह 7 जुलाई 2017 का दिन मैं कैसे भूल सकता हूँ। उसी दिन मेरी बेटी का जन्मदिन था और मैं बहुत खुश था तभी मेरे होटल पर पुलिस रेड पड़ी और उसके बाद सबकुछ बदल गया। मेरे साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया गया और उस दिन के बाद से मैं कभी ठीक से चल नही सका। यह कहना है महराजगंज जिले के व्यवसाई दिलीप कुमार शुक्ला का, जो महराजगंज कोतवाली इलाके में दया होटल चलते हैं और इंस्पेक्टर अनुज कुमार सिंह की हैवानियत का शिकार बने । अपनी आप बीती बताते हुए महराजगंज के व्यवसाई दिलीप शुक्ला ने बताया कि इंस्पेक्टर अनुज कुमार सिंह ने उनको इतना प्रताड़ित किया कि उन्होंने आत्महत्या करने की भी कोशिश किया लेकिन पत्नी ने उन्हें मच्छर मारने की दवा पीते हुए देख लिया और लोग समय रहते अस्पताल लेकर गए जहां इलाज के बाद उनकी जान बची। उन्होंने कहा कि मेरे होटल को लोग मन्दिर भी कहते हैं क्योंकि आज तक हमने यहाँ कोई गलत काम नही किया ।
यह मुख्यमंत्री योगी के जिले में तैनात उस इंस्पेक्टर की काली करतूत है जिसने पिछले दिनों पत्रकारों को पेशाब पिलाने की बात कही थी और जिसके विरोध में पत्रकारों ने एसएसपी व आईजी जोन को ज्ञापन दिया। 
बताते चलें कि वर्तमान में गोरखपुर जिले में पिपराईच थानेदार के रूप में तैनात अनुज कुमार सिंह की पोस्टिंग पहले पड़ोसी जिले महराजगंज में थी जहाँ वह काफी बदनाम रहे थे। जब हम उनके कारनामों की पड़ताल करते हुए महराजगंज पहुंचे तो वहां दबंग थानेदार की पहली स्याह करतूत होटल व्यवसाई दिलीप शुक्ला से सुनने को मिली। 
अपना हाल सुनते हुए दिलीप शुक्ला ने बताया कि जब इंस्पेक्टर अनुज कुमार सिंह निचलौल में तैनात थे तब उन्होंने हमारे होटल में एक पार्टी का आयोजन किया था और जब उसका भुगतान मांगा गया तो उन्होंने पुलिसिया रौब दिखाना शुरू किया और मुझे देख लेने की बात कही। उसके बाद जब उनकी पोस्टिंग महराजगंज कोतवाली में हुई तो उन्होंने मुझे प्रताड़ित करने का कोई मौका नही छोड़ा। दिलीप शुक्ला ने भावुक होकर बताया कि अगर यहाँ के पत्रकारों और समाज सेवियों का सहयोग न होता तो मैं आज तक फर्जी मुकदमें जेल की सलाखों के पीछे होता। उनका कहना था कि अनुज सिंह आपराधिक मानसिकता रखने वाला एक दरिंदा है जिसने मेरी जिंदगी नर्क बना दिया।
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