Friday, March 20, 2026
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सहायिका के लाख प्रयास के बावजूद भी नहीं सुधर सकता सरकारी शिक्षा का मंदिर

अवधनामा की मुहिम पड़ताल सिटी के सरकारी विद्यालय में बेनाझाबर माध्यमिक विद्यालय का रियलिटी चेक
सहायिका के लाख प्रयास के बावजूद भी नहीं सुधर सका सरकारी शिक्षा का मंदिर
पड़ताल सिटी के सरकारी विद्यालय में उजागर हुई बात
कुछ गुड़ ढीला- कुछ बनियां वाले ढर्रे से हांसिये पर स्कूल की व्यवस्था
कानपुर महानगर। कहते हैं कि हर विभाग में कुछ न कुछ लोग हकीकत बहुत ही अच्छे होते हैं। और यही अच्छे लोग अपने अच्छे विचारों से विभाग में चार चाँद लगाने का काम करते हैं। बस जरूरत होती है तो सिर्फ और सिर्फ अच्छी सोंच और अच्छे विचारों की। लेकिन समाज में ऐसे लोग बिरले ही होते हैं।
ऐसा ही शिक्षा विभाग के सरकारी स्कूल पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेना झाबर में चरितार्थ हो रहा है। इस विद्यालय की बिगड़ी हालत को सुधारने में स्कूल सहायिका सारिका शुक्ला ने कोई कसर नहीं छोड़ी। सहायिका के अथक प्रयास से विद्यालय की दयनीय स्थिति तो सुधरी लेकिन विभागीय लचर रवैये और एक अकेली सोंच को कोई सपोर्ट न मिलने के कारण शिक्षा के मंदिर की हालत सुधारने का वीणा उठायी जानें वाली उनकी उम्मीदों को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका।
सहायिका सारिका बताती हैं कि वह इस विद्यालय में माह जुलाई में आईं। विद्यालय में आने के बाद उन्होंने जो विद्यालय की कक्षाओं का रूप देखा तो आँखे खुली की खुली रह गईं। स्कूल कैम्पस सहित स्कूल के कमरों में भीषण गंदगी और भनभनाते मच्छरों ने उनकी अंतरात्मा को कचोट दिया।
बेहद कम छात्रों की संख्या वाले इस स्कूल में सहायिका ने प्रथम द्रष्टया स्वच्छता पर ध्यान दिया और विद्यालय परिसर में खड़ी बड़ी-बड़ी झाड़ीनुमा घास को कटवाया और कूड़े के ढेरों को खत्म करवाया।
स्वच्छता पसंद इस शिक्षका ने बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुये रोजाना क्लास रूम खुलने पर “ब्लैक हिट” छिड़कवाना शुरू किया जिससे भरे पड़े मच्छरों से बचाव हो सके।
जुलाई माह में स्कूल के अंदर विद्यायल कैम्पस में भरने वाले बारिश के पानी की समस्या से भी निजात पाने के लिये काम कराया।
क्लास में बैठने के लिये बच्चों के फट्टों को हटवाकर फर्नीचर की व्यवस्था करवाने पर जोर दिया। एक संस्था के माध्यम से इन्हीं के प्रयास से बच्चों को फर्नीचर मुहैया हुआ। बच्चों को स्वच्छ पीने के पानी हेतु इन्होंने एक एनजीओ के माध्यम आरो लगवाया। विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या बढ़ाने पर फोकस किया।
लेकिन इतने प्रयास के बावजूद भी आज यहाँ कोई खास बात नहीं दिखती!
दरअसल हमारे रियलिटी चेक में ये बात सामने आई कि स्कूल के ठीक बगल में एक नामी-गिरामी अस्पताल है इस अस्पताल के सफाई कर्मचारी अस्पताल में निकलने वाला कचरा कहीं दूर न ले जाकर स्कूल की खाली पड़ी जमीन की बाउंड्री के अंदर ही फेंकते है। जिससे आज भी कूड़ा ढेरों में तब्दील है। यहाँ कूड़ा फेंकने में अगल बगल के पड़ोसी भी कम नहीं हैं। यहाँ स्कूल की बाउंड्री बीच बीच में आधी हो चुकी है। बताया जाता है कि यहाँ के पड़ोसी ही इस बाउंड्री की ईंटे आधी किये दे रहे हैं। साथ ही छुट्टी के बाद कैम्पस में मैच खेलने वाले बच्चों द्वारा भी दीवाल की ईंटे बर्बाद की जा रही हैं। जिससे कि बाउंड्री बीच-बीच में आधी सी हो गई है।
गम्भीर समस्या है कि स्कूल की क्लासें चलते समय क्षेत्रीय अराजक तत्वों द्वारा स्कूल कैम्पस में बाइक से चक्कर लगाना पढ़ाई में व्यवधान डालता है।
“अवधनामा” की मुहिम पड़ताल सिटी के सरकारी विद्यालय… के समय संवाददाता टीम  की नजर विद्यालय में देश के कर्णधारों को दिये जा रहे मिड्डे मील (खाने) पर पड़ी तो हालात बहुत ही चौकाने वाले थे। इस विद्यालय में मिड्डे मील की सप्लाई का जिम्मा लिये संस्था नौनिहालों को जो खाना सप्लाई कर रही है वो किसी जानवर जैसे खाने से कम नहीं था। जली हुई पत्थर जैसी रोटियाँ और पानी जैसी दाल इस बात की चीख चीख कर गवाही दे रही थी। पूछने पर पता चला कि संस्था द्वारा बच्चों को दिया जाने वाला दूध भी बिल्कुल पाउडर का फेना होता है जिसको कभी-कभी बच्चों को न देकर सुरक्षा की दृष्टि से पेड़ों की जड़ों में फिंकवा दिया जाता। मिड्डे मील की चीफ क्वालिटी पर जब सप्लाई कर रही संस्था प्रकाश शिक्षण एवं समाजसेवी संस्था के जिम्मदारों से बात की गई तो संस्था जिम्मेदार कुछ भी बोलने से कतराते रहे। सोंचने वाली बात है कि आखिर किसकी मिलीभगत से ऐसा दो कौड़ी का मिड्डे मील स्कूल में सप्लाई किया जा रहा है। जबकि खराब खाने की शिकायत स्कूल प्रसाशन द्वारा हमेशा से ही की जा रही है।
अब बात ये आती है कि सरकार चाहें लाख प्रयास कर ले कि देश और राज्य के सरकारी विद्यालयों की स्थितियां चाक चौबंद हों लेकिन अधीनस्थ जिम्मदारों और रग-रग में भ्रष्टाचार भरे कुछ लोगों की वजह से सरकारी योजनाओं और सरकार की मनसा पर स्थितयां बद से बदतर हैं।
सर्वोत्तम तिवारी की रिपोर्ट
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