Wednesday, March 25, 2026
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रेलवे के कागजी घोड़ों की टॉप से बिखरा नाहिदा खातून का पूरा परिवार, 35 साल से नहीं मिला न्याय: विजय कुमार पाण्डेय

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रेलवे के कागजी घोड़ों की टॉप से बिखरा नाहिदा खातून का पूरा परिवार, 35 साल से नहीं मिला न्याय: विजय कुमार पाण्डेय

न्याय की सर्वाधिक आवश्यकता “अंतिम-आदमी” को है सम्पन्न के लिए तो पूरी कायनात सहयोगी है: विजय कुमार पाण्डेय

“अंतिम-आदमी” के साथ खड़े होकर अपने दायित्वों का निर्वहन करे अधिवक्ता समाज: विजय कुमार पाण्डेय

गाजीपुर निवासिनी श्रीमती नहीदा खातून के पति मुहम्मद मासु खान वर्ष 1974 में रेलवे में भर्ती हुए थे जो गार्ड के पद पर पश्चिम-बंगाल में सेवारत थे, वर्ष 1992 में ड्यूटी के दौरान लापता हो गए लेकिन रेलवे ने न तो रिपोर्ट दर्ज कराई और न ही परिवार से सम्पर्क करके पूंछा, पत्नी के इन्तजार का सब्र जब टूट गया तो उसने रेलवे से सम्पर्क किया तब पता चला l उसने प्रथम सूचना-रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने दर्ज नहीं किया तब उसने रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजा, लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई l

पत्नी ने रेलवे को पत्र लिखा तो उसे बताया गया कि उसके पति को तो ड्यूटी से अनुपस्थिति रहने के कारण बर्खास्त कर दिया गया है l इतना लम्बा समय व्यतीत हो जाने के बावजूद न तो पत्नी को पेंशन ही दी गयी और न ही उसके पुत्र को नौकरी l गाजीपुर से दिल्ली तक तक दौड़-भाग करने के बावजूद कोई आशा की किरण नहीं दिखी l किसी व्यक्ति के बताने पर लखनऊ आकर अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय से मुलाक़ात करके आपबीती सुनाई l विजय पाण्डेय ने पीड़ित महिला के केश को निःशुल्क लड़ने का आश्वाशन दिया और कहा कि न्याय के दरवाजे तक अब आपको पहुंचाना मेरी जिम्मेदारी है शेष नियति पर छोड़ दीजिए l

विजय पाण्डेय ने पत्रकारों को बताया कि व्यवस्था कितनी निर्मम हो चुकी है इस मामले में देखा जा सकता है, रेलवे ने कोई कदम नहीं उठाया और 2010, 2013  और 2014 में जांच हुई आश्वाशन मिला, दबाव के बाद पुलिस सक्रिय हई लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला, पूरा परिवार बिखर गया लेकिन, कागज के घोड़े दौड़ने के अलावा कुछ हुआ नहीं आखिर सरकार और व्यवस्था “अंतिम-आदमी” की उपेक्षा कब तक करेंगी ? परिणाम कुछ भी हो अब हम पीड़ित महिला को न्याय के दरवाजे तक पहुंचाएंगे, आर्थिक रुकावट को न्याय के सामने बाधा नहीं बनने देंगें l हम भी इसी समाज के अंग हैं और हमारा दायित्व एक अधिवक्ता होने के नाते बड़ा है, न्याय की सर्वाधिक आवश्यकता पीड़ित और वंचित को है सम्पन्न के लिए तो पूरी कायनात सहयोगी है l

https://www.youtube.com/watch?v=ij2i2REOvGo&t=27s


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