Friday, March 13, 2026
spot_img
HomeMarqueeतुलसी- शालीग्राम की पूजा क्यों की जाती है

तुलसी- शालीग्राम की पूजा क्यों की जाती है

join us-9918956492———-

कृष्णलीला में तुलसी शालीग्राम और रामलीला में प्रगटे हनुमान
शबरी, सुग्रीव विभीषण के साथ हुआ लंका दहन का मंचन
62 रामोत्सव का नौवां दिन


लखनऊ। तुलसी- शालीग्राम की पूजा क्यों की जाती है, जालंधर का वध कैसे हुआ, राम ने बाली वध क्यों किया और सोने की लंका कैसे जली, इन कथाओं का सुंदर मंचन शुक्रवार को राजधानी के बरहा, आलमबाग में चल रहे 62 वें रामोत्सव में किया गया। मथुरा से आए आदर्श रामलीला एवं रासलीला मंडल ने दोपहर को कृष्णलीला के आठवें दिन जालंधर युद्ध का मंचन कुशलतापूर्वक किया। भगवान और जालंधर के युद्ध को वर्षों बीत जाते हैं पर जालंधर हार नहीं मानता है तब प्रभु राक्षस के बल का पता लगाते है। वो देखते हैं कि जालंधर की पत्नी वृंदा के सतीत्व के कारण राक्षस को ताक़त मिलती रहती है। भगवान जालंधर का रूप धारण करके वृंदा का सतीत्व भंग कर देते हैं और उसके बाद जालंधर मारा जाता है। वृंदा को जब अपने साथ हुए छल का पता चलता है तो वह भगवान को पत्थर हो जाने का श्राप दे देती है। प्रभु श्राप को स्वीकार करते हैं और वृंदा को वृक्ष बन कर पूजे जाने का वरदान देते हैं। व्यास सूरज प्रसाद कहते हैं तभी से वृंदा की तुलसी के रूप में और भगवान की शालीग्राम रूप में पूजा की जाती हैं। समिति के कोषाध्यक्ष विश्वजीत ने बताया कि शनिवार को दशहरा मेला की सारी तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी और पुतलों का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।

रात्रि में रामलीला के नौवें दिन शबरी भगवान का अपनी कुटिया में स्वागत करती है और बेर चख चख कर खिलाती है तथा किष्किंधा का पता बताती है। लीला में पहली बार हनुमान जी प्रगट होते हैं और राम लक्ष्मण का परिचय जान कर उन्हें कंधे पर बिठा कर सुग्रीव के पास ले जाते हैं। प्रभु सुग्रीव से मित्रता करते हैं और बाली का वध कर देते हैं तब वानर राज जामवंत और हनुमान को सीता का पता लगाने दक्षिण दिशा की तरफ़ भेजते हैं। सुंदर काण्ड का अद्भुत मन्चन करते हुए लीला समुद्र तट पर पहुंचती है जहां जामवंत के याद कराने पर बजरंगी को बल याद आता है और वहां सुरसा का संघार करते हुए लंकिनी तक पहुंच जाते हैं। लंकिनी चाटा खा कर लंका में प्रवेश करने देती है और हनुमान विभीषण को पहचान को सीता जी का पता पूछते है। अशोक वाटिका में वे सीता जी को राम मुद्रिका दे कर फल खाने और वाटिका उजाड़ने लगते हैं। ब्रह्म फांस में बंध कर रावण के दरबार में लाए जाते हैं और विभीषण के मना करने के बाद हनुमानजी की पूंछ में आग लगाने की लीला का मंचन किया गया। चौपाईयों और सम्वादों के बीच हनुमानजी समिति द्वारा निर्मित लंका का दहन करते हैं। समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रंजीव ठाकुर ने बताया कि चित्रकला प्रतियोगिता के परिणाम घोषित कर दिए गए हैं और द्वितीय तथा तृतीय पुरस्कारों का वितरण रामलीला के अंतिम दिन शनिवार को किया जाएगा जबकि प्रथम पुरस्कार दशहरा मेला में रविवार को मुख्य अतिथि द्वारा प्रदान किए जाएंगे। शनिवार को रामलीला के अंतिम दिन शिव पूजन, रामसेतु निर्माण, युद्ध, लक्ष्मण शक्ति और कुंभकर्ण वध तक की लीला का मंचन किया जाएगा और बाकी की लीला दशहरा मेले के दौरान खेली जाएगी।

बृजेन्द्र बहादुर मौर्या की रिपोर्ट—————-

https://www.youtube.com/watch?v=Ai63RihKTIE&t=2s


अवधनामा के साथ आप भी रहे अपडेट हमे लाइक करे फेसबुक पर और फॉलो करे ट्विटर पर साथ ही हमारे वीडियो के लिए यूट्यूब पर हमारा चैनल avadhnama सब्स्क्राइब करना न भूले अपना सुझाव हमे नीचे कमेंट बॉक्स में दे सकते है|
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img

Most Popular