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एनजीटी ने अमरनाथ श्राइन गुफा के आसपास के इलाके को साइलेंस जोन घोषित करने का सुझाव दिया है ताकि हिमस्खलन को रोका जा सके. इतना ही नहीं एनजीटी ने अमरनाथ श्राइन गुफा के पास प्रसाद और नारियल फेंकने को भी रोकने का निर्देश दिया है.

एनजीटी ने पूछा है कि साल 2012 के सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है जिसमें क्षेत्र की सुरक्षा करने का निर्देश दिया गया था? एनजीटी ने इस मामले में एक कमेटी बनाई है जो अमरनाथ श्राइन में पर्यावरण की सुरक्षा और श्रद्धालुओं के लिए इंफ्रास्टक्चर को देखेगी. कोर्ट ने इस मामले में पूछा है कि क्यों न अतिरिक्त दुकानें और ओपन टॉयलेट को क्यों नहीं हटाया गया.
आपको बता दें कि 13 नवंबर को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया था कि एक दिन में केवल 50 हजार लोग ही माता वैष्णो देवी का दर्शन कर सकेंगे. एनजीटी ने वैष्णो देवी आने जाने वालों की तादाद तय कर दी थी. एनजीटी ने कहा था कि वैष्णो देवी के पास नया निर्माण नहीं किया जाएगा. एनजीटी ने ये फैसला एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया.
एनजीटी ने यह भी कहा था कि वैष्णो देवी में पैदल चलने वालों और बैटरी से चलने वाली कारों के लिए एक विशेष रास्ता 24 नवंबर से खुलेगा. यह निर्देश भी दिया कि मंदिर तक पहुंचने वाले इस नए मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों को जाने की इजाजत नहीं होगी, बल्कि इन पशुओं को धीरे-धीरे पुराने मार्ग से भी हटाया जाएगा.
एनजीटी ने अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया कि कटरा शहर में सड़कों और बस स्टॉप पर थूकने वालों पर 2,000 रुपये का जुर्माना (पर्यावरण मुआवजा) भी लगाया जाए.
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