ईरान-अमेरिका युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया है, जिससे पाकिस्तान में हालात बदतर हुए हैं। इस बीच बैरिक माइनिंग ने ईरान युद्ध के कारण पाकिस्तान के बलूचिस्तान में अपनी रेको डिक तांबा और सोना परियोजना का काम धीमा कर दिया है।
ईरान और अमेरिका (Iran-US War) के युद्ध से पूरी दुनिया परेशान है क्योंकि इससे ऊर्जा संकट गहरा रहा है और दुनियाभर में एलपीजी व पेट्रोल-डीजल की किल्लत और कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। खासकर, पाकिस्तान (Energy Crisis in Pakistan) में हालात ज्यादा खराब है और अब एनर्जी संकट के साथ-साथ पड़ोसी देश को एक और बड़ा झटका लगा है। दरअसल, ईरान युद्ध और बिगड़ती सुरक्षा स्थितियों का हवाला देते हुए बैरिक माइनिंग पाकिस्तान में अपनी प्रमुख कॉपर और गोल्ड प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट पर काम धीमा कर रही है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा और व्यापक भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण हुई समीक्षा के बाद, टोरंटो स्थित खनन कंपनी ने जुलाई से शुरू होने वाले 12 महीनों के लिए ‘रेको डिक परियोजना’ में खर्च और काम की गति को कम करने का फैसला किया है। रेको डिक (Reko Diq) प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े अविकसित तांबे (Copper) और सोने (Gold) के खनन प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के चगाई जिले में, अफगानिस्तान और ईरान की सीमा के करीब स्थित है।
कंपनी ने पाकिस्तानी साझेदारों से क्या कहा?
“एफटी के अनुसार, बैरिक ने अपने पाकिस्तानी पार्टनर्स और परियोजना के स्थानीय संचालक को बताया, “समीक्षा के प्रारंभिक निष्कर्षों के बाद और पाकिस्तान और मिडिल ईस्ट में सुरक्षा मुद्दों के मद्देनजर, कंपनी संभावित प्रभावों और वितरण रणनीति का आगे आकलन करना आवश्यक समझती है।” कंपनी ने कहा कि विकास गतिविधियों में कमी आएगी और परियोजना खर्च में भी कटौती होगी, साथ ही चेतावनी दी कि समय-सीमा और बजट प्रभावित होंगे। एफटी के अनुसार, बैरिक ने इस मामले पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
इस परियोजना से जुड़े लोगों ने एफटी को बताया, मंदी के कारण रेको डिक में पहला उत्पादन कम से कम 2029 तक टलने की आशंका है। इससे पहले, खदान का लक्ष्य 2028 में प्रारंभिक उत्पादन शुरू करना था, जिसे स्थानीय साझेदार पहले से ही आक्रामक मानते थे।
देरी की क्या वजह?
ईरान संघर्ष के कारण परियोजना के लिए महत्वपूर्ण सप्लाई चैन में अड़चन पैदा होने से यह देरी हुई है। युद्ध के चलते खाड़ी देशों से ईंधन और खनन उपकरणों का परिवहन मुश्किल हो गया है, जबकि तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के कारण परियोजना की कुल लागत, जो लगभग 9 अरब डॉलर अनुमानित है, इसका फिर से मूल्यांकन करना पड़ रहा है।
क्या मायने रखती है रेको डिक खदान?
एक अनुमान के अनुसार, रेको डिक खदान में लगभग 5.9 अरब टन तांबे और सोने का अयस्क मौजूद है। इस माइन से 40 साल से ज्यादा समय तक लगातार तांबे और सोने का उत्पादन किए जाने की उम्मीद है। खदान का निर्माण कार्य दो चरणों में किया जाएगा और साल 2028 तक इसका पहला उत्पादन शुरू होने का लक्ष्य रखा गया है।
रेको डिक माइन को पाकिस्तान के लिए एक ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस खदान से उसे भारी विदेशी मुद्रा मिलेगी, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को एक बड़ा सहारा मिलेगा।





