एटीएस के विशेष न्यायाधीश ने तीन माओवादी नक्सलियों – शिवराज सिंह बगदवाल, कृपाशंकर और राजेंद्र कुमार उर्फ अरविंद को दस साल के कारावास और प्रत्येक पर 29-29 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
लखनऊ। माओवादी विचारधारा के नक्सली स्पेशल एरिया कमांडर शिवराज सिंह बगदवाल, कृपाशंकर और राजेंद्र कुमार उर्फ अरविंद को एटीएस के विशेष न्यायाधीश जैनेंद्र कुमार पांडेय ने दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 29-29 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया है।
एटीएस के संयुक्त निदेशक नागेंद्र गोस्वामी ने बताया कि एटीएस के दारोगा राजीव द्विवेदी ने एटीएस थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराकर बताया था कि एटीएस के एएसपी के नेतृत्व में सीपीआई के कुछ पदाधिकारियों और सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।
जिनसे पूछताछ में पता चला कि इस प्रतिबंधित संगठन के साहित्य का स्टोर संगठन के सदस्य शिवराज सिंह के किदवई नगर कानपुर स्थित घर में है, जहां संगठन के और भी सदस्य मौजूद है। इस जानकारी पर एटीएस ने शिवराज सिंह के घर पर छापा मारा, जहां से एटीएस ने शिवराज सिंह, राजेन्द्र कुमार उर्फ अरविंद और कृपाशंकर को गिरफ्तार किया था।
एटीएस को दोषियों के पास से बड़ी संख्या में नकद रुपये और सीपीआई माओवादी से संबंधित प्रतिबंधित साहित्य जिसमे देश की अखंडता की विघटित करने और प्रभुता को चुनौती देने की बाते लिखी थी को बरामद किया था। एटीएस की पूछताछ में शिवराज ने बताया की प्रतिबंधित साहित्य का प्रकाशन का काम उसके द्वारा किया जाता था और उसके घर पर ही साहित्य का स्टोर था जहां से नक्सली संगठन के लोग साहित्य ले जाते थे और समर्थकों में वितरित करते थे।
राजेन्द्र सिंह उर्फ अरविंद ने बताया कि वह नक्सली लीडर बसलराज और कोवार्ड गांधी के बीच कैरियर का कम करता है। वह काफी दिनों तक कोबार्ड गांधी के साथ दिल्ली में रह चुका है और वह साहित्य के प्रकाशन और वितरण में शिवराज और बलराज की मदद करता था।





