जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह करने की दिया चेतावनी
गोंडा। जहां एक तरफ योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है वहीं दूसरी तरफ दबंग भूमाफिया दूसरे की जमीन हथियाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, बता दें कि एक वृद्ध प्रार्थी राजपति सिंह पुत्र स्वर्गीय रामनरेश सिंह निवासी ग्राम चरौंहा, थाना-परसपुर जिला-गोण्डा का निवासी है। जिसने पुलिस अधीक्षक को अपने लिखित तहरीर में बताया कि प्रार्थी बचपन से ही ग्राम महेशपुर, परगना नवाबगंज, तहसील तरबगंज में रहने लगा, और वहीं रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की, जिसमें कामता प्रसाद सुन्दरलाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय अयोध्या फैजाबाद से बीए, एलएलबी की पढ़ाई पूरी की, और ग्राम महेशपुर में रहने के दौरान प्रार्थी ने कई खातेदारों की भूमि पर काबिज व दखील हो गये और कृषि कार्य करने लगे।
इसी दौरान गांव में चकबन्दी प्रक्रिया प्रारम्भ हुई और दौरान चकबन्दी दीर्घकालीन कब्जे के आधार पर कई नम्बरान सहायक चकबन्दी अधिकारी के आदेश से बकाया लगान जमा करते हुये प्रार्थी का नाम संक्रमणीय भूमिधर दर्ज कागजात हुआ और प्रार्थी का नाम आधार वर्ष व सीएच 23, सीएच 41, सीएच 45 बनते हुये सीएच 45 की नई खाता संख्या-103 की गाटा संख्या-399/9.16 एकड़ दर्ज कागजात हुआ और उसके बाद कई खतौनियां प्रार्थी के नाम बनीं। ग्राम महेशपुर के कुछ भू-माफिया एक कथित महिला संजू देवी उर्फ गायत्री देवी कथित पुत्री राजपति सिंह का बताकर प्रार्थी के नाम दर्ज भूमि गाटा संख्या-399 का प०क0-11 का आदेश दिनांक-27.07.2006 को दर्ज कागजात करा लिया।
प्रार्थी को जानकारी होने पर प्रार्थी ने उक्त प०क0-11 आदेश निरस्त कराने का प्रार्थना पत्र तहसील तरबगंज में दिया, जो काफी समय तक विचाराधीन रहा। इसी दौरान भू-माफियाओं द्वारा प्रार्थी की उक्त पत्रावली तहसील से गायब करा दी गई और उक्त प०क0-11ख आदेश दिनांक-27.07.2006 के आधार पर संजू देवी उर्फ गायत्री देवी ने उक्त भूमि का बैनामा कई लोगों को कर दिया। प्रार्थी तभी से सक्षम अधिकारियों के समक्ष दौड़ रहा है, किन्तु कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। प्रार्थी ने उक्त फर्जी प०क0-11 आदेश के विरूद्ध थाना तरबगंज जनपद गोण्डा में मुकदमा अपराध संख्या-492/2024 विपक्षीगण के विरूद्ध पंजीकृत कराया, जिसमें विवेचक महोदय द्वारा विपक्षीगण के प्रभाव में आकर अन्तिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी है।
जिससे प्रार्थी काफी आहत है। 18 वर्ष व्यतीत हो जाने के बाद प्रशासन द्वारा फर्जी तरीके से दर्ज की गई प०क0-11ख आदेश दिनांक-27.07.2006 निरस्त नहीं किया गया तथा प्रार्थी जीवित होते हुये भी मृतक की श्रेणी में बना हुआ है, जो प्रार्थी के साथ घोर अन्याय है। यदि मुकदमा अपराध संख्या-492/2024 की पुनः निष्पक्ष विवेचना नहीं करायी गयी तो प्रार्थी मजबूर होकर जिलाधिकारी महोदय के आवास के सामने आत्महत्या करने को मजबूर होगा।





