Sunday, March 1, 2026
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उम्र से पहले बूढ़ी हो रही आँखें तेज़ी से बढ़ रहा लोगों का नम्बर: डॉ अमित पटेल

अम्बेडकरनगर हवा और वातावरण में घुलता प्रदूषण का जहर हमारी आंखों की रोशनी को कम कर रहा है। हमारी आंखें उम्र से पहले ही बूढी हो रही है। हवा में बढ़ते धूल कण, जहरीले कीटनाशकों, रासायनिक तत्वों, भारी धातुओं, वाहनों व फैक्ट्रियों के निकलते विषाक्त धूएं से आंखों की कार्निया (नेत्र पटल) तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। कॉर्निया की पारदर्शिता प्रभावित होने से नजर धुंधली हो रही है।

उक्त बाते बुधवार को मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग के प्रोफेसर एवम विभागाध्यक्ष डॉ अमित पटेल ने बताया कि अब बच्चों और युवकों की आंखें कमजोर पड़ना आम बात हो गई हैं। चिंता की बात यह है कि जिन लोगों को चश्मा लगा हुआ है, उनके चश्मा के पावर पहले की तुलना में दो से तीन गुना तेजी से बदल रहे हैं।

इसका मुख्य कारण प्रदूषित हवा कॉर्निया की ऊपरी परत को धीरे-धीरे घिसती है। इससे आंखों में जलन, रूखापन,आंसुओ की कमी , धुंधलापन और अस्थाई रूप से कॉर्नियल डैमेज की समस्यायें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि यही रफ्तार रही तो अगले 10 वर्षों में भारत में कॉर्नियल डैमेज के मामले दो गुने तक हो सकते हैं। इससे आने वाली पीढ़ी में आंखों की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने बताया कि प्रदूषण तत्वों का कुछ उच्च स्तर आंखों में माइक्रो स्क्रैच पैदा करता है। जिससे अपवर्तन शक्ति अस्थिर हो जाती है। और चश्मे का नंबर बढ़ता जाता है। इसके अलावा हवा में पीएम 2.5 का उच्च स्तर आंखों की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को 5 साल तक तेज कर देता है। ऐसे में हमारी आंखें 5 साल बाद जितनी खराब होती, वह पहले ही खराब हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि प्रदूषण जनित इस समस्या में जीन थेरेपी बेहद कारगर है, जीन थेरेपी से कार्निया को अपारदर्शी बनाने वाली जीन को ही इम्यून बना दिया जाता है,इस दिशा मे शोध कार्य चल रहा है ।स्टेम सेल प्रत्यारोपण से भी डैमेज कानिॅया को ठीक किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि खेतों में काम करने वाले किसानों में लगभग 30% लोग आंख की किसी ने किसी समस्या से जूझ रहे हैं। जिनमें रासायनिक प्रदूषण सबसे बड़ा कारण है। इस तरह से रख सकते हैं आंखों को स्वस्थ।

डॉक्टर पटेल कहते हैं कि बढ़ते प्रदूषण में बाहर निकलते समय आंखों को कवर करने वाला यू वी प्रोटेक्ट वाला चश्मा अवश्य लगाए, आंखों में जलन होने पर कृत्रिम आंसू वाले अच्छे आई ड्रॉप (लुब्रिकेंट आई ड्रॉप) का प्रयोग करें। तथा बाहर से घर लौटने पर हमेशा सादा पानी से आंखें जरूर धोएं। विटामिन ए से भरपूर भोजन, हरी सब्जियां एवम पीले फलों का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें। मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी आदि के लिए स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल करते हुए कम करें। ऐसा करने से आंखें हमेशा स्वस्थ रहेंगी ।

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