जैसे हैं मेरे पीर वैसा कोई पीर नहीं है
इटावा। शहर में कौमी एकता की प्रतीक दरगाह हज़रत अबुल हसन शाह वारसी कटरा शहाब खां में 101 वें चार दिवसीय सालाना उर्स सुबह हज़रत हाजी हाफ़िज़ सैय्यद वारिस अली शाह के कुल के साथ पूरा हुआ।शुक्रवार को बाद नमाज़ फज्र कुरआन ख़्वानी हुई।दिन में ज़ोहर की नमाज़ के बाद मज़ार शरीफ हज़रत सैय्यद अबुल हसन शाह वारसी का ग़ुस्ल हुआ जिसमे मुंबई से और पारसी परिवार के खुसरो नरीमन वारसी व परवेज हवलदार की ओर से सन्दल व चादरें पेश की गईं।
इसके बाद रात्रि को महफिले सिमा में कव्वाल राजा सरफराज रामपुर ने कलाम पेश करते हुए कहा ऐसा कोई दिलकश कोई दिल गीर नहीं है,जैसे हैं मेरे पीर वैसा कोई पीर नहीं है।कव्वाल अली वारिस मुंबई ने कुछ इस तरह कहा आज दूल्हा बने हैं वारिस पिया मदीने से सहरा मंगाया गया,औलिया अम्बिया सब बाराती है शाहे वारिस को दूल्हा बनाया गया।कव्वाल अफ्फान वारिस देवा शरीफ ने कहा तेरा दर मिल गया मुझको सहारा हो तो ऐसा हो,तेरे टुकड़ों पर पलते है सहारा हो तो ऐसा हो,बदल देते हैं तकदीर इशारा हो तो ऐसा हो।
उर्स के मौके पर अकीदतमंदों ने दरगाह शरीफ को दुल्हन की मानिंद सजाकर अपनी मोहब्बत का सुबूत पेश किया।उर्स के आख़री दिन शनिवार को सुबह 4:13 बजे कुल शरीफ हज़रत हाजी हाफ़िज़ सैय्यद वारिस अली शाह के बाद मजलिस इमामैन अलैहिस्सलाम हुई।उर्स की अध्यक्षता सैयद साद महमूद वारसी सद्दू मियां मैनेजर आस्ताना आलिया देवा शरीफ बाराबंकी ने की।
मुख्य अतिथि सैयद साकिब मुईनी चिश्ती खादिम दरगाह अजमेर शरीफ और विशिष्ट अतिथि आई.एम.कुद्दूसी पूर्व गवर्नर झारखंड/पूर्व मुख्य न्यायाधीश हाईकोर्ट प्रयागराज रहे।अंत मे बाद नमाज़ फजर तबर्रूक(प्रसाद)वितरण किया गया।उर्स में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे,दरगाह गेट पर आस्थाई पुलिस चौकी पर पुलिस कर्मी तैनात रहे।उर्स में आने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा दरगाह में मेडिकल कैम्प लगाया गया। नगर पालिका परिषद द्वारा सफाई की बेहतरीन व्यवस्था की गई थी।ट्रस्ट के लोगों ने जिला एवं पुलिस प्रशासन, सीएमओ,नगर पालिका अध्यक्ष व ईओ सहित उर्स में शामिल होने वाले अतिथियों व अकीदतमंदों का शुक्रिया अदा किया।
दरगाह वारसी में सरकार वारिसे पाक के कुल शरीफ से पूर्व रात्रि को महफिले सिमा में कलाम पेश करते कव्वाल व मौजूद अकीदतमंद।





