Monday, December 1, 2025
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शशि थरूर ने की पीएम मोदी के भाषण की तारीफ, कांग्रेस बोली- प्रशंसा के लायक कुछ भी नहीं

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने एक अन्य कांग्रेसी नेता द्वारा पीएम मोदी के भाषण की प्रशंसा पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भाषण में प्रशंसा लायक कुछ नहीं था। इस घटना ने कांग्रेस के भीतर मतभेदों को उजागर किया है, जहां कुछ नेता मोदी की आलोचना करते हैं, वहीं कुछ प्रशंसा करते हैं।

कांग्रेस नेता शशि थरूर के सुर लगातार बदले जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी से सांसद होने के बावजूद वे अक्सर सार्वजनिक मंच पर पीएम मोदी समेत सरकार के कई फैसलों की सराहना करते दिखाई देते हैं। इनके इस तारीफ से कांग्रेस पार्टी में खलबली मच जाती है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रामनाथ गोयनका व्याख्यान की कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने खुलकर तारीफ कर दी। उन्होंने भारत की आर्थिक दिशा को रेखांकित करने और देश की विरासत को गौरवशाली बनाने पर जोर देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की। शशि थरूर के इस तारीफ को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे “तुच्छ और क्षुद्र भाषण” करार देते हुए हैरानी जताई और कहा कि थरूर को इसमें सराहना लायक बात कैसे दिख गई?

शशि थरूर के इस तारीफ को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे “तुच्छ और क्षुद्र भाषण” करार देते हुए हैरानी जताई और कहा कि थरूर को इसमें सराहना लायक बात कैसे दिख गई? यह आश्चर्यजनक है। मुझे तो यह एक तुच्छ भाषण लगा। प्रधानमंत्री दिन-रात कांग्रेस के बारे में ही सोचते रहते हैं।

प्रशंसा के लायक कुछ भी नहीं

मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा “मुझे भाषण में प्रशंसा के लायक कुछ भी नहीं लगा। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री को कई बातों का जवाब देना चाहिए। वह एक अखबार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्हें हमें बताना चाहिए था कि निष्पक्ष पत्रकारिता से उन्हें क्या परेशानी है। उन्हें हमें बताना चाहिए था कि वह सच दिखाने और बोलने वालों से खुश क्यों नहीं हैं… इसलिए, मुझे उनकी सराहना करने का कोई कारण नहीं दिखा।”

क्या बोले थे शशि थरुर

गौरतलब है कि तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद ने एक्स पर कहा, “कल रात इंडियन एक्सप्रेस के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रामनाथ गोयनका व्याख्यान में शामिल हुआ। उन्होंने विकास के लिए भारत की ‘रचनात्मक अधीरता’ के बारे में बात की और उपनिवेशवाद-विरोधी मानसिकता पर जोर दिया।”

उन्होंने आगे लिखा, “कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का संबोधन एक आर्थिक दृष्टिकोण और एक सांस्कृतिक आह्वान दोनों था, जिसमें राष्ट्र को प्रगति के लिए तत्पर रहने का आग्रह किया गया। सर्दी-खांसी से जूझने के बावजूद दर्शकों के बीच उपस्थित रहकर खुशी हुई!”

इस दौरान उन्होंने उन लोगों पर भी कटाक्ष किया जो उन्हें और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हमेशा “चुनावी मोड” में रहने वाला कहते हैं और कहा कि विकास के प्रति प्रतिबद्धता और लोगों की भावनाओं के प्रति 24×7 “भावनात्मक मोड” में रहने से भाजपा को चुनाव में जीत मिलती है।

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