Wednesday, March 4, 2026
spot_img
HomeEducationउच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग से ज्यादा हुए आरक्षित वर्ग के...

उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग से ज्यादा हुए आरक्षित वर्ग के छात्र

एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षित वर्ग के छात्रों की संख्या सामान्य वर्ग के छात्रों से अधिक हो गई है। 2023 में, आरक्षित वर्ग के छात्रों का नामांकन सामान्य वर्ग के छात्रों से 95 लाख अधिक था। यह बदलाव आरक्षण नीतियों के प्रभाव को दर्शाता है।

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि देश भर के कॉलेज और यूनिवर्सिटी में संख्या के लिहाज से सामान्य वर्ग के छात्रों का दबदबा है। लेकिन पिछले दशक में एक बड़ा बदलाव आया है और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का असर दिखने लगा है। इसी का नतीजा है कि आरक्षित वर्ग के छात्रों ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी में नामांकन के मोर्चे पर सामान्य वर्ग के छात्रों को पीछे छोड़ दिया है। अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी में 100 में से 60 से अधिक छात्र अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़े वर्गों से आ रहे हैं।

आईआईएम उदयपुर के सेंटर फॉर डेवलपमेंट पॉलिसी एंड मैनेजमेंट द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़े वर्गों की नामांकन में संयुक्त हिस्सेदारी 2010-11, में 43.1 प्रतिशत थी। 2022-23 में यह तेजी से बढ़ कर 60.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। सिर्फ 2023 में आरक्षित वर्गों के छात्रों का नामांकन सामान्य वर्गों के छात्रों से 95 लाख अधिक रहा है। वहीं, सामान्य वर्ग के छात्रों की नामांकन में हिस्सेदारी 2011 में 57 प्रतिशत थी, जो 2023 में गिर कर 39 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों की संख्या भी जोड़ी गई है। अध्ययन के निष्कर्ष 13 वर्ष के ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन (एआईएसएचई) के आंकड़ों पर आधारित हैं। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान 2010-11 से 20222-23 की जनगणना के स्तर की एआईएसएचई रिपोर्ट का विश्लेषण किया। इसमें 60,380 संस्थानों और 4.38 करोड़ छात्रों को कवर किया गया है। इन्हीं आंकडों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि सरकारी संस्थानों में एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों की नामांकन में हिस्सेदारी 62.2 प्रतिशत और निजी संस्थानों में 60 प्रतिशत है।

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि देश भर के कॉलेज और यूनिवर्सिटी में संख्या के लिहाज से सामान्य वर्ग के छात्रों का दबदबा है। लेकिन पिछले दशक में एक बड़ा बदलाव आया है और उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का असर दिखने लगा है। इसी का नतीजा है कि आरक्षित वर्ग के छात्रों ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी में नामांकन के मोर्चे पर सामान्य वर्ग के छात्रों को पीछे छोड़ दिया है। अब कॉलेज और यूनिवर्सिटी में 100 में से 60 से अधिक छात्र अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़े वर्गों से आ रहे हैं।

आईआईएम उदयपुर के सेंटर फॉर डेवलपमेंट पॉलिसी एंड मैनेजमेंट द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़े वर्गों की नामांकन में संयुक्त हिस्सेदारी 2010-11, में 43.1 प्रतिशत थी। 2022-23 में यह तेजी से बढ़ कर 60.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। सिर्फ 2023 में आरक्षित वर्गों के छात्रों का नामांकन सामान्य वर्गों के छात्रों से 95 लाख अधिक रहा है। वहीं, सामान्य वर्ग के छात्रों की नामांकन में हिस्सेदारी 2011 में 57 प्रतिशत थी, जो 2023 में गिर कर 39 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

इसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों की संख्या भी जोड़ी गई है। अध्ययन के निष्कर्ष 13 वर्ष के ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन (एआईएसएचई) के आंकड़ों पर आधारित हैं। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान 2010-11 से 20222-23 की जनगणना के स्तर की एआईएसएचई रिपोर्ट का विश्लेषण किया। इसमें 60,380 संस्थानों और 4.38 करोड़ छात्रों को कवर किया गया है। इन्हीं आंकडों का विश्लेषण करने पर पाया गया कि सरकारी संस्थानों में एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों की नामांकन में हिस्सेदारी 62.2 प्रतिशत और निजी संस्थानों में 60 प्रतिशत है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img
- Advertisment -spot_img

Most Popular