राज्यपाल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, महिला सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण का दिया व्यापक संदेश
अलीगढ़। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि आधुनिकता का वास्तविक अर्थ पहनावे या बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचारों, संस्कारों और आचरण से होता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को मजबूती से थामे रखते हुए ही जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। यही भारतीय संस्कृति की पहचान है और यही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगी।
राज्यपाल एवं कुलाधिपति सोमवार को राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का नाम महान शिक्षाविद, समाज सुधारक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर रखा गया है। यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि उनके आदर्शों और राष्ट्रसेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों में महापुरुषों के जीवन, विचारों और योगदान पर वाद-विवाद, भाषण, निबंध एवं अन्य प्रतियोगिताओं का नियमित आयोजन कराया जाए, ताकि युवा पीढ़ी उनके आदर्शों को आत्मसात कर सके। उन्होंने कहा कि हमें आत्ममंथन करना होगा कि क्या हम वास्तव में उनके बताए मार्ग पर चल रहे हैं।
राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में 50 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं सम्मान प्रदान किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह गर्व का विषय है कि उत्तीर्ण विद्यार्थियों में 51 प्रतिशत छात्राएं और 49 प्रतिशत छात्र हैं। यह बदलते सामाजिक परिवेश और बेटियों की बढ़ती शैक्षणिक उपलब्धियों का प्रमाण है।
उन्होंने विश्वविद्यालय में लागू की गई डिजिटल व्यवस्था की विशेष सराहना करते हुए कहा कि सभी विद्यार्थियों की अंकतालिकाएं अब डिजिलॉकर में उपलब्ध करा दी गई हैं। इससे विद्यार्थियों को अंकतालिका प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और वे देश-दुनिया के किसी भी स्थान से इंटरनेट के माध्यम से अपने दस्तावेज आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और सुशासन के लिए भारत सरकार द्वारा समर्थ पोर्टल संचालित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से आवेदन, प्रवेश, प्रोन्नति एवं अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं सरल और पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था पहले भी लागू की जा सकती थी, लेकिन नहीं की गई। अब तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों को सरल, सुगम और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ज्ञान, संस्कार, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देना ही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति के लिए दिल्ली जाने की आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति जहां है, वहीं से ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करके राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कार्यक्रम में आंगनबाड़ी बच्चों के लिए खेल सामग्री एवं स्वास्थ्य किट उपलब्ध कराने पर जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी की सराहना करते हुए कहा कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी निधि का जनहित में इस प्रकार उपयोग किया जाना अनुकरणीय है। स्वास्थ्य के विषय पर विशेष जोर देते हुए राज्यपाल ने एचपीवी वैक्सीन का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि 9 से 14 वर्ष आयु की बालिकाओं का समय पर टीकाकरण किया जाए तो भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है। उन्होंने अधिक से अधिक बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन से प्रतिरक्षित किए जाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ बेटियां और स्वस्थ महिलाएं ही विकसित भारत की आधारशिला हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत का अर्थ केवल बड़े अस्पताल बनाना नहीं है, बल्कि ऐसा समाज बनाना है जहां लोगों को गंभीर बीमारियां ही कम हों। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि एम्स जैसे संस्थानों में जाने वाले मरीजों की संख्या कुल मरीजों की तुलना में बहुत कम रह जाए, तभी वास्तव में देश को स्वस्थ और विकसित माना जाएगा। एनीमिया उन्मूलन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालयों में छात्र-छात्राओं के हीमोग्लोबिन परीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क ही बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य का आधार हैं।
बाल विवाह पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कम उम्र में विवाह से बालिकाओं का बचपन, शिक्षा और स्वास्थ्य प्रभावित होता है। जिस आयु में उन्हें पढ़ना, खेलना और अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहिए, उस समय उन्हें घरेलू जिम्मेदारियों में नहीं उलझाया जाना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से बेटियों की शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने की अपील की।





