कनिष्का श्री ने ‘रश्मिरथी’ व वीर रस पर किया ओजस्वी काव्य पाठ
गोरखपुर । गोरखपुर पुस्तक महोत्सव में रविवार की शाम कविताओं, गीतों और तालियों की गूंज से जीवंत हो उठी। साहित्य और संगीत के इस अद्भुत संगम ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध युवा कवि रुद्रा उत्कर्ष शुक्ल के कुशल संचालन से हुआ, जिन्होंने अपनी ओजस्वी कविताओं से दर्शकों को जोड़े रखा। इसके पश्चात मंच पर एक से बढ़कर एक कवि उतरे — कनिष्का श्री, रुचि अनुपम त्रिपाठी और अंकुर सचर ने अपनी सशक्त पंक्तियों से मन को छू लिया।
विशेष रूप से कनिष्का श्री ने “रश्मिरथी” और वीर रस पर आधारित अपने जोशपूर्ण काव्य पाठ से श्रोताओं के हृदय में उत्साह और भावनाओं की लहर दौड़ा दी। उनकी प्रभावशाली अभिव्यक्ति, सशक्त उच्चारण और मंच पर आत्मविश्वासपूर्ण उपस्थिति ने वातावरण को ओज से भर दिया। दर्शक देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से उनकी सराहना करते रहे — हर शब्द मानो हृदय से उतरकर आत्मा तक पहुंच गया।
कार्यक्रम में संगीत की सुरमयी छटा बिखेरते हुए फनकार बैंड के कलाकार दुर्गेश शुक्ल, अंकिता राय, शिव प्रकाश शुक्ल, पवन कुमार, प्रतीक चौधरी, आदर्श एवं नमन ने अपनी स्वर लहरियों से शाम को यादगार बना दिया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन, एनबीटी के प्रोजेक्ट मैनेजर श्री अशोक धनकर, प्रो. अनुभूति दुबे, प्रो. विनीता पाठक, प्रॉक्टर तटी एन. मिश्रा, ‘एक नई आशा’ संस्था के संस्थापक श्री आशीष छापड़िया, श्री राकेश श्रीवास्तव, तथा एस.एस. एकेडमी के प्रबंधक श्री कनक हरि अग्रवाल एवं डॉ. निशि अग्रवाल सहित अनेक शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कवि सम्मेलन के पश्चात विश्वविख्यात पद्मश्री मालिनी अवस्थी जी के कार्यक्रम की वजह से पंडाल दर्शकों से खचाखच भरा रहा, जिससे पूरा परिसर उत्सवमय वातावरण में डूब गया।
कवि सम्मेलन का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर उनमें साहित्यिक चेतना का संचार करना रहा। यह आयोजन निःसंदेह गोरखपुर के सांस्कृतिक जीवन में एक यादगार पृष्ठ के रूप में दर्ज हो गया।





