अंबेडकरनगर नगर पालिका क्षेत्र की गलियां टूटी, नालियां जाम, कचरे के ढेर जस के तस… लेकिन हिम्मत देखिए कि नगर पालिका ने जनता पर तीन गुना हाउस टैक्स का बोझ लाद दिया। विकास की जगह बढ़ा हुआ टैक्स! यही है जनमानस के गुस्से की असली वजह।लोग कह रहे हैं कि जब तक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी जा सकीं, तब तक नगर पालिका को टैक्स बढ़ाने का अधिकार किसने दे दिया?
सड़कें गड्ढों में, सफाई अधूरी और स्ट्रीट लाइटें गुल—फिर जनता से तीन गुना पैसा किस विकास के नाम पर वसूला जा रहा है?सबसे बड़ा सवाल रसीदों को लेकर खड़ा हो गया है। हाउस टैक्स की जो पर्चियां जनता को दी जा रही हैं, उन पर नगर पालिका का अधिकृत स्टैंप ही नहीं है। ऐसे में जनता का कहना है कि अगर इस मनमानी को न्यायालय में चुनौती दी जाए तो किस आधार पर की जाएगी?
पर्चियों पर स्टैंप न होना अपने आप में रहस्य और शक को गहरा कर रहा है।जनमानस का आरोप है कि यह सीधा-सीधा विभागीय लापरवाही और पारदर्शिता की हत्या है। लोग अब खुलेआम चर्चा कर रहे हैं कि अगर नगर पालिका ने अपनी नीति स्पष्ट नहीं की तो सड़कों पर आंदोलन होगा।सीधा सवाल—“विकास शून्य और टैक्स तीन गुना, आखिर कब तक चलेगा यह खेल?”





