सिद्धार्थनगर। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान (100 दिवसीय विशेष कार्यक्रम) के अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशन में तथा नालसा आशा जागरूकता, समर्थन, सहायता एवं कार्यवाही योजना के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सिद्धार्थनगर तथा मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के संयुक्त सहयोग से पैरालीगल स्वयंसेवकों (PLVs) के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शैलेन्द्र नाथ द्वारा किया गया। इस दौरान उन्होंने पैरालीगल स्वयंसेवकों को बाल संरक्षण के क्षेत्र में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि बाल विवाह मुक्त भारत तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक वर्ग इस सामाजिक बुराई के विरुद्ध मिलकर प्रयास करे। उन्होंने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में आशा योजना के अंतर्गत समुदाय स्तर पर जागरूकता फैलाने हेतु PLVs को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण सत्र में चीफ डिफेंस काउंसिल अश्वनी मिश्रा ने बाल विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधानों एवं रिपोर्टिंग प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। महिला कल्याण विभाग से सविता एवं अपर्णा विश्वास ने विभाग द्वारा बाल विवाह की रोकथाम हेतु संचालित विभिन्न अभियानों/ योजनाओ की जानकारी साझा की। मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान के प्रतिनिधि प्रसून शुक्ल ने बाल विवाह के विरुद्ध अभियान में रिपोर्टिंग की प्रक्रिया, बाल संरक्षण से जुड़े हितधारकों तथा जन-जागरूकता गतिविधियों पर प्रकाश डाला।
प्रतिभागियों को बताया गया कि बाल विवाह न केवल एक दंडनीय अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं शैक्षणिक विकास में भी गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। इसके साथ बाल विवाह के खिलाफ सभी को शपथ कराया गया। इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से अर्जुन झा, मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान से रोहित दुबे, विजयशंकर, हृदय सिंह, मनीष, ज्योति, रूपा सहित पैरालीगल स्वयंसेवक प्रदीप कुमार, रेहाना खातून, मनीषा, प्रियंका आदि की उपस्थिति रही।





