पंचायत सहायकों का विरोध, तहसीलदार पर अभद्रता का आरोप – एग्री स्टेट डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर उठी मांगें

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महोबा। पनवाड़ी पंचायत सहायक यूनियन उत्तर प्रदेश के बैनर तले बुधवार को विकासखंड पनवाड़ी के पंचायत सहायकों ने ब्लॉक परिषद सभागार में बैठक की। इस दौरान पंचायत सहायकों ने नायब तहसीलदार अभिषेक मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पंचायत सहायकों से अभद्र भाषा का प्रयोग किया और संगठन का ज्ञापन लेने से इंकार कर दिया।

पूरा मामला एग्री स्टेट डिजिटल क्रॉप सर्वे से जुड़ा है, जिसे पंचायत सहायकों के माध्यम से कराया जा रहा है। पंचायत सहायकों का कहना है कि उन्हें इस कार्य को संपन्न करने के लिए आवश्यक उपकरण और सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। जबकि सर्वे का कार्यभार लगातार बढ़ता जा रहा है। पंचायत सहायकों ने ब्लॉक अध्यक्ष कृष्णकांत, शिवम, परवीन खातून, निर्देश कुमारी, रश्मि कुमारी, प्रियंका, ऋचा श्रीवास्तव, सुप्रिया और काजल आदि के नामों के साथ एकजुट होकर अपनी मांगें सामने रखीं।

पंचायत सहायकों ने बताया कि ब्लॉक स्तर के ऑफिशियल ग्रुप के माध्यम से उन्हें निर्देश मिला था कि संगठन के पदाधिकारी सामूहिक रूप से तहसीलदार को प्रार्थना पत्र सौंपें। इसी सूचना के आधार पर ब्लॉक अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी जब कार्यालय पहुँचे तो नायब तहसीलदार ने न केवल प्रार्थना पत्र लेने से इनकार कर दिया बल्कि उनके साथ असम्मानजनक भाषा का प्रयोग किया।

पंचायत सहायकों ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उनके ब्लॉक अध्यक्ष का मोबाइल फोन कार्यालय कर्मचारियों ने छीन लिया ताकि किसी प्रकार की रिकॉर्डिंग या वीडियोग्राफी न हो सके। इस घटना से सभी पंचायत सहायकों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने कहा कि तहसील स्तर पर कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जा रहा है और सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा।

पंचायत सहायकों ने साफ कहा कि वे एग्री स्टेट डिजिटल क्रॉप सर्वे कार्य करने को तैयार हैं, लेकिन शासन को पहले जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध करानी होंगी। उनकी मुख्य मांगों में उच्च गुणवत्ता वाला स्मार्टफोन या टैबलेट, विभागीय इंटरनेट युक्त मोबाइल सिम कार्ड, कार्य के दौरान दुर्घटना होने पर सुरक्षा व्यवस्था और बीमा शामिल हैं।

पंचायत सहायकों ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की सर्वे के दौरान दुर्घटना या जंगली जीव-जंतु के हमले से मृत्यु हो जाती है तो उसके परिजन को 10 लाख रुपये का बीमा लाभ और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जानी चाहिए।

दूसरी ओर, जब इस प्रकरण पर नायब तहसीलदार अभिषेक मिश्रा से संवाददाताओं ने बात की तो उन्होंने पंचायत सहायकों के आरोपों को खारिज कर दिया। मिश्रा का कहना है कि पंचायत सहायकों को क्रॉप सर्वे कार्य के लिए ब्लॉक सभागार में बुलाया गया था। शासन स्तर से उन्हें क्रॉप कटिंग के लिए पाँच रुपये प्रति इकाई की दर से भुगतान की व्यवस्था है। लेकिन पंचायत सहायकों ने बैठक में सहयोग करने के बजाय विरोध जताया और चार सूत्रीय मांगों को शासन तक पहुँचाने पर अड़े रहे।

फिलहाल, पंचायत सहायक संगठन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी उचित मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा। उनका कहना है कि सम्मान और आवश्यक सुविधाओं के साथ ही वे इस महत्वपूर्ण सर्वे कार्य को ईमानदारी और पूरी क्षमता से संपन्न कर सकेंगे।

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