महोबा। गुरू गोरखनाथ परिक्रमा समिति के तत्वावधान में मंगलवार को मास पूर्णिमा के अवसर पर भक्तों ने शिव मंदिर से श्रद्धा, भक्ति और राम धुन के साथ पैदल चलकर ऐतिहासिक गोरखगिरि की परिक्रमा लगाई। परिक्रमा दौरान गाए जा रहे भजनों और लगाए जा रहे भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। परिक्रमा समाप्ति के बाद मंदिर परिसर में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने गोरखगिरि पर्वत के महत्व के अलावा होली पर्व को लेकर फाग की प्रस्तुति देकर माहौल को रंगों से सराबोर कर दिया।
मास पूर्णिमा पर लगाई गई परिक्रमा शिवतांडव मंदिर से प्रारंभ होकर महावीरन, पठवा के हनुमान, केदारेश्वर महादेव, सकरे सन्या, छोटी चंडिका, काली माता, शनिदेव, वैष्णो देवी, नागौरिया, काल भैरव मंदिर से होते हुए पुलिस लाइन होते हुए वापस मंदिर पर पहुंचकर संपन्न हुई। परिक्रमा में श्रद्धालु जय श्रीराम, जय गोरखनाथ के जयकारे लगाते हुए श्रद्धा भाव के साथ पैदल चल रहे थे।
परिक्रमा मार्ग पर विराजमान देवी देवताओं के मंदिरों पर श्रद्धालुओं ने माथा टेंका और सुख सवृद्धि की कामना करते हुए अगे बढ़े। परिक्रमा समाप्त होने के बाद मंदिर परिसर में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में पंडित हरीशर नायक ने गोरखगिरि की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करते हुए कहा कि जिले का ऐतिहासिक गोरखगिरि पर्वत लगभग 2000 फीट ऊँचा है और यहां प्राकृतिक सुंदरता, घनी हरियाली, मनमोहक झरनों और प्राचीन सिद्ध बाबा मंदिर है, जिससे यह बुंदेलखंड का प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। कहा कि यहां शांत वातावरण, जड़ी बूटियों से समृद्ध है।
समिति प्रमुख डॉ. एलसी अनुरागी ने ईसुरी की चौकड़िया फाग की तर्ज पर स्वरचित फाग सुनाई कि गोरखगिरि के दर्शन करियो पैकरमा सब करिया, शिवतांडव में सत्संग करियो जीवन फसल बनइयो, गेर परिक्रमा बसै देवगण चरन न कीरज लइयो, अनुरागी की विनती सुनियो पैकरमा में अइयो। उन्होंने कहा कि चौदह वर्ष के वनवास काल दौरान इस पर्वत पर श्रीराम, सीता व लक्ष्मण आए थे, जिससे इस पर्वत को चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत की तरह धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान है। इस मौके पर मुन्नालाल धुरिया, पवन चौरसिया, राकेश चौरसिया, परशुराम अनुरागी, चंदभान श्रीवास, सुनीता अनुरागी, अवधेश तिवारी, अजीत, विनोद सहित तमाम माता बहने मौजूद रही। अंत में होली की शुभकामनाएं देते हुए प्रसाद का वितरण किया गया।





