भारत में निपाह वायरस की वापसी हुई है, पश्चिम बंगाल में दो नर्सें संदिग्ध संक्रमित पाई गई हैं, जिसके बाद ओडिशा में अलर्ट जारी किया गया है। यह जूनोटिक बीमारी मुख्य रूप से चमगादड़ों से फैलती है और इसके गंभीर लक्षण हो सकते हैं। वर्तमान में कोई टीका या इलाज न होने के कारण, सावधानी ही बचाव का एकमात्र तरीका है, जिसमें हाथ धोना और संक्रमित फलों से बचना शामिल है।
देश में एक बार फिर निपाह वायरस ने दस्तक दे दी है। बीते दिनों पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के एक निजी अस्पताल में दो नर्सों के संदिग्ध निपाह वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इन मामलों के सामने आते ही ओडिशा में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है।
ऐसे मे इस वायरस से बचाव और इससे खुद को सुरक्षित रखने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आज इस आर्टिकल में हम आपको इस वायरस और इससे होने वाले इन्फेक्शन से जुड़ी ऐसी ही कुछ बातों के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं क्या है निपाह वायरस और क्यों हैं यह इतना खतरनाक-
निपाह वायरस क्या है?
निपाह वायरस (NiV) एक ‘जूनोटिक’ बीमारी है, जिसका मतलब है कि यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। इस संक्रमण मुख्य रूप से ‘फ्रूट बैट’ (Fruit Bat) या चमगादड़ से फैलता है, जिसे उड़ने वाली लोमड़ी (Flying Fox) भी कहा जाता है।
यह वायरस सबसे पहले साल 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सामने आया था। उस दौरान यह चमगादड़ों से सूअरों और फिर सूअरों के संपर्क में आने वाले इंसानों में फैला था। इस दौरान लगभग 300 लोग संक्रमित हुए थे, जिनमें से 100 से ज्यादा की जान चली गई थी।
किन जगहों पर सबसे ज्यादा मिलते हैं इसके मामले?
बात करें इससे प्रभावित जगहों की, तो निपाह वायरस के मामले मुख्य रूप से भारत, बांग्लादेश, मलेशिया, सिंगापुर और फिलीपींस में देखने को मिलते हैं। हालांकि, इस वायरस को फैलाने वाले चमगादड़ एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण प्रशांत के कई हिस्सों में पाए जाते हैं, इसलिए खतरा व्यापक हो सकता है।
निपाह वायरस के लक्षण
यह इन्फेक्शन हल्का भी हो सकता है और जानलेवा भी। इससे ब्रेन में सूजन (Encephalitis) होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसके शुरुआती लक्षण वायरस की चपेट में आने के 4 से 14 दिनों के अंदर लक्षण दिखने लगते हैं। इनके प्रमुख लक्षणों में निम्न शामिल हैं-
- बुखार
- गले में खराश
- खांसी और सांस लेने में तकलीफ
- चक्कर आना
- सुस्ती और भ्रम होना
- गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन आ जाती है, जिससे मरीज 24 से 48 घंटों के भीतर कोमा में जा सकता है।
कैसे फैलता है यह वायरस?
निपाह वायरस मुख्य रूप से तीन तरीकों से फैलता है और ये 3 तरीके निम्न हैं-
- जानवरों से: संक्रमित चमगादड़ों या सूअरों के सीधे संपर्क में आने से।
- खाने-पीने से: चमगादड़ के जूठे फल खाने या कच्चे खजूर का रस (ताड़ी) पीने से। जब वायरस जानवर से इंसान में आता है, तो इसे ‘स्पिलओवर इवेंट’ कहते हैं।
- इंसानों से: एक बार संक्रमित होने के बाद, यह वायरस मरीज के बॉडी फ्लुइड्स जैसे- लार, खून आदि के जरिए दूसरे लोगों में भी फैल सकता है।
कैसे रखें अपना ख्याल
फिलहाल निपाह वायरस का कोई पक्का इलाज या इसकी कोई वैक्सीन अभी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इससे बचााव का सबसे आसान तरीका सावधानी ही है:
- अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोते रहें।
- बीमार सूअरों और चमगादड़ों वाले इलाकों से दूर रहें।
- जमीन पर गिरे हुए फल या ऐसे फल जिन पर किसी जानवर के दांत के निशान हों, उन्हें बिल्कुल न खाएं।
- कच्चे खजूर के रस को पीने से भी बचें।
- संक्रमित व्यक्ति के खून या बॉडी फ्यूइड के संपर्क में आने से बचें। संक्रमित लोगों की देखभाल करने वाले लोगों को संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है।





