अकाली दल वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह को पैरोल न मिलने पर पिता तरसेम सिंह ने सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित सांसद को संसद जाने से रोकना लोकतंत्र का अपमान है। तरसेम सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई गई, लेकिन खडूर साहिब के लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया। इस बीच, गायक जसकरण रियाड़ ने अमृतपाल की पार्टी जॉइन की।
अमृतसर। अकाली दल वारिस पंजाब दे के प्रमुख और खडूर साहिब से लोकसभा सांसद अमृतपाल सिंह को पैरोल न मिलने के मुद्दे पर पिता तरसेम सिंह ने सरकार और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। तरसेम सिंह ने कहा कि एक निर्वाचित लोकसभा सदस्य को संसद में जाने से रोकना लोकतंत्र का सीधा अपमान है।
तरसेम सिंह ने कहा कि संसद सत्र शुरू होने से पहले ही पैरोल के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था, लेकिन सत्र समाप्त होने तक कोई फैसला नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र की ही हत्या की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सिखों के साथ ही ऐसा अलग व्यवहार क्यों किया जाता है।
खडूर साहिब के लोगों की भावनाएं हुई नजरअंदाज
तरसेम सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई गई, लेकिन इसके बावजूद खडूर साहिब के लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया। अमृतपाल सिंह लोकसभा में अपने क्षेत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों जैसे नशाखोरी, बाढ़ की समस्या और कानून-व्यवस्था पर बात रखना चाहते थे, लेकिन पंजाब और केंद्र सरकार दोनों ही उन्हें संसद पहुंचने से रोकने में लगी हुई हैं।
तरसेम सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद गुरजीत सिंह औजला और अकाली नेता मनप्रीत अयाली सहित कई राजनीतिक हस्तियों ने इस मुद्दे को मानवाधिकारों से जोड़ते हुए अमृतपाल सिंह के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लाखों मतदाताओं की आवाज दबाने का है।
जसकरण रियाड़ ने जॉइन की अमृतपाल की पार्टी
इस दौरान प्रसिद्ध पंजाबी लोक गायक और सिख धार्मिक गीतों के लिए पहचाने जाने वाले जसकरण रियाड़ ने अकाली दल वारिस पंजाब दे की सदस्यता ग्रहण कर ली। तरसेम सिंह ने कहा कि जसकरण रियाड़ के पार्टी में शामिल होने से संगठन को मजबूती मिलेगी।
जसकरण रियाड़ ने कहा कि अमृतपाल सिंह द्वारा युवाओं को नशे से दूर रखने, अमृतपाल के लिए प्रेरित करने और अजनाला क्षेत्र में बाढ़ के दौरान धर्म से ऊपर उठकर की गई सेवा से वह प्रभावित हुए हैं। राजनीति में उनका अनुभव भले ही सीमित हो, लेकिन पंथक और सामाजिक सेवा के लिए वह हमेशा तैयार रहेंगे।





