HomeHealthमोबाइल की स्क्रीन बन रही आंखों की दुश्मन

मोबाइल की स्क्रीन बन रही आंखों की दुश्मन

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक लोग घंटों स्क्रीन पर समय बिताते हैं। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि मोबाइल चलाते ही आंखों में जलन, चुभन, पानी आने या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं होने लगती हैं? अगर हां, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

लंबे समय तक मोबाइल की स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव पड़ सकता है। इसे डिजिटल आई स्ट्रेन या डिजिटल आई सिंड्रोम से जुड़ी परेशानी कहा जाता है। इसके पीछे केवल स्क्रीन की रोशनी ही नहीं, बल्कि हमारी कुछ आदतें और आसपास का वातावरण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।

मोबाइल चलाते समय आंखों में जलन की 5 बड़ी वजहें

1. लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव

जब हम लंबे समय तक मोबाइल पर वीडियो देखते हैं, गेम खेलते हैं या लगातार पढ़ते रहते हैं, तो आंखों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है। स्क्रीन पर लगातार ध्यान केंद्रित करने से आंखों में थकान, भारीपन और सिरदर्द महसूस हो सकता है।

2. पलकें कम झपकाना

सामान्य परिस्थितियों में हम नियमित रूप से पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों की सतह पर आंसुओं की परत बनी रहती है। लेकिन मोबाइल देखते समय पलकें झपकाने की दर कम हो सकती है। इससे आंखों की सतह सूखने लगती है और जलन, खुजली या किरकिरापन महसूस हो सकता है।

3. आंखों में सूखापन

एसी वाले कमरे, पंखे की सीधी हवा, कम नमी और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों का सूखापन बढ़ सकता है। जिन लोगों को पहले से ड्राई आई की समस्या है, उन्हें मोबाइल इस्तेमाल करते समय अधिक परेशानी हो सकती है।

4. स्क्रीन की चमक और गलत दूरी

बहुत तेज या आसपास की रोशनी के मुकाबले बहुत कम स्क्रीन ब्राइटनेस आंखों को असहज कर सकती है। मोबाइल को आंखों के बहुत करीब रखकर देखने या छोटे अक्षरों को लगातार पढ़ने से भी थकान बढ़ सकती है।

5. नींद की कमी और लगातार मोबाइल इस्तेमाल

देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद का समय प्रभावित हो सकता है। पर्याप्त आराम नहीं मिलने पर आंखों में थकान, भारीपन और परेशानी अधिक महसूस हो सकती है। लगातार बिना ब्रेक स्क्रीन देखने से भी लक्षण बढ़ सकते हैं।

आंखों को राहत देने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

20-20-20 नियम अपनाएं: हर 20 मिनट में लगभग 20 सेकंड के लिए 20 फीट यानी करीब 6 मीटर दूर रखी किसी वस्तु को देखें।

पलकें झपकाते रहें: स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करते समय जानबूझकर नियमित रूप से पलकें झपकाएं, ताकि आंखों की सतह नम बनी रहे।

ब्राइटनेस सही रखें: मोबाइल की रोशनी को कमरे की रोशनी के अनुसार समायोजित करें। स्क्रीन को आंखों से उचित दूरी पर रखें और अक्षरों का आकार जरूरत के मुताबिक बढ़ाएं।

लगातार इस्तेमाल से बचें: लंबे समय तक मोबाइल चलाने के बजाय बीच-बीच में ब्रेक लें। सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल भी कम करने की कोशिश करें।

आंखों में परेशानी होने पर जांच कराएं: अगर जलन बार-बार होती है, आंखें लगातार लाल रहती हैं या धुंधला दिखाई देता है, तो नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से ही आई ड्रॉप का इस्तेमाल करें।

कब नहीं करनी चाहिए लापरवाही?

अगर आंखों में अचानक तेज दर्द हो, नजर अचानक कम हो जाए, रोशनी के आसपास रंगीन घेरे दिखाई दें या आंखों में तेज लालिमा के साथ परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। इन लक्षणों को केवल मोबाइल के इस्तेमाल का असर मानकर नजरअंदाज न करें।

 

 

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