कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने सीएमआरएल (CMRL) कथित घूस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और दामाद पीए मोहम्मद रियास को बड़ा झटका दिया है। गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निचली पीठ के उस आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं, जिसमें मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले के बाद मामले की जांच आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और वीणा टी की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस (Exalogic Solutions) के बीच हुए वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। आरोप है कि सीएमआरएल ने वीणा की कंपनी को सेवाओं के बदले भुगतान के नाम पर बड़ी रकम दी, जबकि इन भुगतानों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और जानकारियों के आधार पर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद मामला केरल हाईकोर्ट पहुंचा।
हाईकोर्ट ने पहले क्या आदेश दिया था?
9 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि ईडी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी, बयानों और दस्तावेजों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की जरूरत है।
इसके बाद विजयन, उनकी बेटी वीणा और मोहम्मद रियास ने इस आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी। उनका पक्ष था कि आदेश पारित करते समय उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं मिला।
हाईकोर्ट के ताजा फैसले का क्या मतलब है?
15 अक्टूबर को न्यायमूर्ति के. नटराजन और न्यायमूर्ति जॉनसन जॉन की खंडपीठ ने अपील की अनुमति देने संबंधी याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे एकल पीठ का एफआईआर दर्ज करने का निर्देश बरकरार है।
हालांकि, यह फैसला आरोपों को साबित करने वाला अंतिम निर्णय नहीं है। मामले में आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। संबंधित पक्षों के पास कानून के तहत उपलब्ध अन्य उपायों का सहारा लेने का विकल्प भी हो सकता है।
अब आगे क्या होगा?
सीएमआरएल मामले में जांच एजेंसियों की भूमिका और आरोपों से जुड़े तथ्यों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य और अदालतों में होने वाली सुनवाई से मामले की अगली दिशा तय होगी।





