नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य उत्पादों के प्रचार में कथित भ्रामक स्वास्थ्य दावों को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। नियामक ने जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया लिमिटेड, बिगबास्केट और फ्लिपकार्ट इंडिया को नोटिस जारी किया है। यह मामला ‘फ्रीडम कुकिंग राइस ब्रान ऑयल’ के विज्ञापनों और ऑनलाइन प्रचार में किए गए स्वास्थ्य संबंधी दावों से जुड़ा है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
FSSAI के अनुसार, संबंधित कुकिंग ऑयल के प्रचार में दावा किया गया था कि इसका सेवन खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने या बढ़ाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, उत्पाद में 10,000 पीपीएम से अधिक प्राकृतिक ओराइज़नॉल होने का दावा भी किया गया था।
नियामक ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चावल की भूसी से बने खाद्य तेल के लिए इस तरह के स्वास्थ्य संबंधी दावे निर्धारित विज्ञापन एवं दावों के नियमों के तहत अनुमत नहीं हैं।
किन कंपनियों को जारी हुआ नोटिस?
कार्रवाई के दायरे में तीन कंपनियां शामिल हैं:
- जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया लिमिटेड: कुकिंग ऑयल बनाने और उसका प्रचार करने वाली कंपनी।
- बिगबास्केट: ऑनलाइन किराना और खाद्य उत्पाद बेचने वाला प्लेटफॉर्म।
- फ्लिपकार्ट इंडिया: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, जहां संबंधित उत्पाद का प्रचार और बिक्री की गई।
FSSAI ने कंपनियों से जवाब मांगा है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और संबंधित नियमों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
जेमिनी एडिबल्स पर लाइसेंस को लेकर भी सवाल
FSSAI ने जेमिनी एडिबल्स एंड फैट्स इंडिया लिमिटेड के अपने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से खाद्य उत्पाद बेचने पर भी सवाल उठाए हैं। नियामक के अनुसार, कंपनी के पास इस गतिविधि के लिए आवश्यक वैध केंद्रीय लाइसेंस होने की पुष्टि नहीं हुई। इस पहलू पर भी कंपनी से जवाब मांगा गया है।
क्या कुकिंग ऑयल पर लगेगा प्रतिबंध?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई कथित भ्रामक दावों और नियामकीय अनुपालन से संबंधित है। नोटिस जारी होने का अर्थ अपने आप में उत्पाद पर प्रतिबंध लगना या कंपनियों को दोषी घोषित किया जाना नहीं है। आगे की कार्रवाई कंपनियों के जवाब और नियामक की जांच पर निर्भर करेगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है जरूरी?
खाद्य तेल या किसी भी खाद्य उत्पाद को खरीदते समय केवल विज्ञापनों में किए गए स्वास्थ्य संबंधी दावों के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए। उत्पाद के लेबल, सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी और नियामक निर्देशों को ध्यान से देखना जरूरी है।





