सिद्धार्थनगर। भगवान राम परात्पर ब्रह्म हैं, जिनकी कृपा से पूरा संसार चलता है और पूरे संसार की रचना करने वाले हैं।वेदों ने बताया है कि भगवान श्रीराम चंद्र जिनके एक-एक रोम में करोड़ों ब्रह्मांड हैं। वह अयोध्या में दशरथ नंदन बनकर आए हैं। उक्त कथामृत की वर्षा नगर पालिका परिषद के अवैद्यनाथ सभागार में आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा में अयोध्या की पावन धरती से पधारे परम पूज्य बालशुक अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित देव कृष्ण शास्त्री जी ने की। उन्होंने कहा कि भगवान सुबह उठकर के अपने माता-पिता और गुरु को सबसे पहले प्रणाम करते हैं। जबकि साक्षात भगवान दशरथ नंदन बनकर आए हैं।
इन्हीं से सारी सृष्टि चलती है सारी सृष्टि के पालन करता है। संत ऋषि मुनि इत्यादि जितने जीव संसार में हैं सभी जीवों का भरण पोषण करने वाले हैं। पुत्र का कर्तव्य होता है कि वह सबसे पहले प्रातः काल उठकर के अपने माता-पिता और गुरु जनों का चरण स्पर्श करे ठीक उसी प्रकार भगवान माता-पिता और गुरुदेव भगवान का चरण स्पर्श करते हैं। फिर अपने माता-पिता की आज्ञा लेकर कोई कार्य प्रारंभ करते हैं। इस प्रसंग से हमको यह सीख मिलता है कि माता-पिता का चरण छू करके ही कोई कार्य प्रारंभ करना चाहिए क्योंकि माता-पिता और गुरुदेव भगवान के स्वरूप होते हैं।
श्रीराम कथा के मुख्य अतिथि न्यायाधीश राघवेंद्र पाण्डेय व नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद माधव को श्रीराम कथा के व्यासपीठ पर देव कृष्ण शास्त्री ने स्वागतस्वरुप आशीर्वाद व प्रभु राम का चित्र भेंटकर सम्मानित किया। अतिथि द्वय ने संस्थापक सदस्य विजय कुमार सिंह, अजय कुमार पाण्डेय, दिनेश तिवारी, उमेश चंद्र मिश्रा, सुमित श्रीवास्तव, संजीव कुमार श्रीवास्तव, अजय कसौधन, फतेह बहादुर सिंह, कंचन सिंह राजपूत, चन्द्र प्रकाश श्रीवास्तव, साधना श्रीवास्तव, नीरू श्रीवास्तव, भूपनरायण सिंह राजन, राघवेंद्र सिंह, उदयशंकर मिश्रा, मनोज दुबे, अजीत कुमार दूबे, राजीव मोहन कलहंस तथा संतकबीरनगर से आये रमेश, अम्बरीष पाण्डेय, रामचरन शुक्ला, रामअजोर, राजकुमार पाण्डेय, ब्रह्मानंद पाण्डेय, रमेश पांडे आदि को प्रभु राम का चित्र आशीर्वाद स्वरूप दिया गया। अध्यक्ष सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन व श्रीराम कथा के संयोजक अखण्ड प्रताप सिंह ने नगरवासियों से अपील की है कि श्रीराम कथा में समय से आकर कथामृत का पान करें।





