लखनऊ। उत्तर प्रदेश में टोल प्लाजा से जुड़े एक कथित फर्जीवाड़े की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसियों को ऐसे नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली है, जिसमें फर्जी फास्टैग और डिजिटल सिस्टम के जरिए टोल भुगतान में हेराफेरी किए जाने के आरोप हैं। मामले की जांच के दौरान एसटीएफ ने सर्वर और कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं।
बताया जा रहा है कि फर्जी फास्टैग के इस्तेमाल के जरिए कुछ वाहनों ने टोल प्लाजा पर सैकड़ों बार आवाजाही की। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन फास्टैग को किस स्तर पर तैयार और सक्रिय किया गया तथा इनके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
जांच का दायरा बढ़ने के साथ कई लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में बताई जा रही है। एसटीएफ द्वारा जब्त किए गए सर्वर और दस्तावेजों से टोल लेनदेन, फास्टैग गतिविधियों और संबंधित खातों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
अधिकारियों की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि फर्जी फास्टैग के जरिए टोल व्यवस्था को किस तरह प्रभावित किया गया और इससे सरकारी राजस्व को कितना नुकसान पहुंचा। डिजिटल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल जांच एजेंसियां उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक डेटा और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही हैं। मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।





