पेरिस: लेबनान में बढ़ते तनाव और दक्षिणी हिस्से में सुरक्षा चुनौतियों के बीच गुरुवार को पेरिस में फ्रांस, लेबनान और जॉर्डन के नेताओं की अहम बैठक हो रही है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय की बैठक में लेबनानी सेना को मजबूत करने और दक्षिणी लेबनान में भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा होगी।
क्या है पेरिस बैठक का मकसद?
बैठक का मुख्य उद्देश्य लेबनानी सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की रूपरेखा तैयार करना है। इसमें सेना को वित्तीय सहायता, उपकरण, प्रशिक्षण, खुफिया सहयोग और दक्षिणी लेबनान में तैनाती से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है। अमेरिका समेत कई देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं।
UNIFIL के भविष्य पर भी नजर
बैठक ऐसे समय हो रही है जब संयुक्त राष्ट्र की लेबनान में शांति स्थापना मिशन UNIFIL का मौजूदा जनादेश 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला है। इसके बाद मिशन के विकल्प या किसी नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी चर्चा चल रही है। फ्रांस और इटली एक नई बहुराष्ट्रीय व्यवस्था की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं, जबकि यूरोपीय संघ की भूमिका पर भी विचार किया जा रहा है।
क्या संकट का समाधान निकल पाएगा?
पेरिस बैठक से तत्काल किसी अंतिम समझौते की घोषणा तय नहीं है। लेबनान-इजरायल के बीच सुरक्षा व्यवस्था, दक्षिणी लेबनान से सैनिकों की वापसी और हिजबुल्लाह के हथियारों से जुड़े मुद्दे अब भी जटिल बने हुए हैं। बैठक का तत्काल फोकस लेबनानी सेना को मजबूत करने और आगे की अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था की ठोस योजना तैयार करने पर है।





