भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने दिसंबर में हजारों उड़ानें रद्द करने के मामले में इंडिगो के खिलाफ विस्तृत जांच का आदेश दिया है। इन रद्द उड़ानों से लाखों यात्री प्रभावित हुए थे। CCI ने इसे बाजार में प्रभुत्व का दुरुपयोग मानते हुए सेवाओं की आपूर्ति सीमित करने के रूप में देखा है। आयोग ने महानिदेशक को मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है, क्योंकि इससे प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) ने परिचालन अड़चनों के कारण दिसंबर में हजारों उड़ानें रद्द किए जाने के मामले में बुधवार को देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (Indigo) के खिलाफ विस्तृत जांच का आदेश दिया। दिसंबर में Indigo ने हजारों की संख्या में फ्लाइट्स रद्द की थी, जिसके चलते लाखों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी थी।
घटना के करीब दो महीने बाद जारी इस आदेश में CCI ने कहा कि बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द कर इंडिगो ने अपनी निर्धारित क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बाजार से हटा लिया, जिससे अभाव की स्थिति पैदा हुई और व्यस्त मांग के दौरान यात्रियों की हवाई यात्रा तक पहुंच सीमित हुई।
क्या बोला आयोग
कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया ने कहा, “किसी प्रभुत्वशाली कंपनी की तरफ से ऐसे आचरण को प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 4 (2)(B)(I) के तहत सेवाओं की आपूर्ति सीमित करने के रूप में देखा जा सकता है।”
प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 4 बाजार में दबदबे की स्थिति के दुरुपयोग से संबंधित है। सीसीआई ने कहा कि प्रथम दृष्टया इंडिगो का यह आचरण भारत में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता प्रतीत होता है।
जांच के लिए दिए महानिदेशक को निर्देश
इसके मद्देनजर आयोग ने मामले की विस्तृत जांच के लिए अपने महानिदेशक को निर्देश दिए हैं। आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो को बड़े स्तर पर परिचालन बाधाओं का सामना करना पड़ा था। इसके बाद नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन के 10 फरवरी तक लागू शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में 10 प्रतिशत की कटौती कर दी थी।
सीसीआई के मुताबिक, तीन से पांच दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द की गईं जबकि 1,852 उड़ानें विलंब से रवाना हुईं। इस दौरान देशभर के हवाई अड्डों पर तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए।





