तकनीकी खामियों के समाधान की प्रक्रिया तेज
अलीगढ़): रसोई गैस के वैकल्पिक स्रोत के रूप में जिले के चंडौस ब्लॉक स्थित ओगर नगला राजू गांव में स्थापित गोवर्धन बायोगैस प्लांट को प्रभावी रूप से संचालित करने के लिए प्रशासन द्वारा तकनीकी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाली यह परियोजना अब चरणबद्ध रूप से बेहतर संचालन की दिशा में आगे बढ़ रही है।
जिला पंचायती राज अधिकारी यतेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि बायोगैस प्लांट का संचालन गोपालकों द्वारा नियमित रूप से किया जा रहा है। प्लांट से उत्पादित बायोगैस का उपयोग गौशाला में कार्यरत गौसेवकों के भोजन निर्माण और गौवंश के दाना पकाने में किया जा रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा का स्थानीय स्तर पर प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्लांट से निकलने वाली बायोस्लरी का उपयोग गौशाला परिसर की भूमि में चारा उत्पादन के लिए जैविक खाद के रूप में किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बायोस्लरी, खाद किसानों को विक्रय कर ग्राम पंचायत स्तर पर राजस्व सृजन भी किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
डीपीआरओ ने यह भी अवगत कराया कि ग्राम स्थित परिषदीय विद्यालय में बच्चों के मिड-डे मील पकाने के उद्देश्य से पाइपलाइन के माध्यम से गैस पहुंचाई गई है, किन्तु तकनीकी खामी के कारण योजना पूर्ण रूप से संचालित नहीं हो सकी। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कार्यदायी संस्था से समन्वय स्थापित कर तकनीकी खामी को दूर कराया जा रहा है, ताकि विद्यालय में शीघ्र ही गैस आपूर्ति प्रारंभ कर बच्चों को स्वच्छ ईंधन आधारित भोजन उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने यह भी इंगित किया कि प्लांट के संचालन में समय-समय पर आने वाली अन्य तकनीकी कमियों का निराकरण ओएसआर मद से कराया जाता है और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। शासन की मंशा एवं निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप बायोगैस प्लांट का उपयोग जनहित में किया जा रहा है।





