हर साल मार्च के दूसरे गुरुवार को World Kidney Day मनाया जाता है। आइए, डॉक्टर से जानते हैं कि कैसे मोटापा किडनी के लिए खतरनाक बन जाता है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खानपान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आमतौर पर लोग मोटापे को दिल की बीमारी, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर से जोड़कर देखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ज्यादा वजन किडनी के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।
आकाश हेल्थकेयर में नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट के निदेशक एवं विभागाध्यक्ष, डॉ. उमेश गुप्ता के अनुसार, मोटापा किडनी की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे प्रभावित करता है और लंबे समय में क्रॉनिक किडनी डिजीज का कारण बन सकता है।

वजन घटाना है किडनी के लिए जरूरी
डॉक्टर का कहना है कि शरीर में अत्यधिक चर्बी जमा होने से कई तरह के मेटाबोलिक बदलाव होते हैं, जो किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इससे किडनी को खून फिल्टर करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे समय के साथ किडनी को नुकसान पहुंच सकता है।
डॉक्टर बताते हैं, “मोटापा केवल शरीर का वजन बढ़ने तक सीमित समस्या नहीं है। यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है, जिनमें किडनी भी शामिल है। ज्यादा वजन होने से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है और ये दोनों ही किडनी डैमेज के प्रमुख कारण हैं। अगर समय रहते वजन नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में किडनी फेल होने का खतरा बढ़ सकता है।”
मोटापा कैसे बढ़ाता है किडनी डिजीज का खतरा?
हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ना
मोटापा अक्सर हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है। जब ब्लड प्रेशर लगातार ज्यादा रहता है, तो किडनी की छोटी रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिससे उनकी फिल्टर करने की क्षमता प्रभावित होती है।
डायबिटीज का खतरा
मोटापे से टाइप-2 डायबिटीज होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। डायबिटीज किडनी फेल होने के सबसे बड़े कारणों में से एक मानी जाती है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से किडनी की फिल्टरिंग यूनिट्स कमजोर होने लगती हैं।
किडनी पर एक्स्ट्रा दबाव
जब शरीर का वजन ज्यादा होता है तो किडनी को खून को फिल्टर करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसे “हाइपरफिल्ट्रेशन” कहा जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने से किडनी के टिश्यू को नुकसान पहुंच सकता है।
शरीर में सूजन और मेटाबोलिक बदलाव
मोटापा शरीर में इन्फ्लेमेशन को बढ़ाता है। यह सूजन धीरे-धीरे किडनी के ऊतकों को प्रभावित कर सकती है और किडनी रोग का खतरा बढ़ा सकती है।

इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
एक्सपर्ट के अनुसार, किडनी की समस्या के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं और लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे पैरों या चेहरे में सूजन, लगातार थकान, पेशाब में झाग, बार-बार पेशाब आना या भूख कम लगना। ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
डॉक्टर कहते हैं, “मोटापे से पीड़ित लोगों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट कराना चाहिए। खासकर जिन लोगों को हाई बीपी या डायबिटीज है, उनके लिए यह और भी जरूरी हो जाता है। समय पर जांच से किडनी की बीमारी को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है।”
किडनी को सुरक्षित रखने के उपाय
डॉक्टर के मुताबिक किडनी को स्वस्थ रखने के लिए बैलेंस डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और वेट कंट्रल करना बेहद जरूरी है। रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी, कम नमक वाला खाना, पर्याप्त पानी पीना और जंक फूड से दूरी बनाना किडनी की सेहत के लिए फायदेमंद होता है।
इसलिए, अगर मोटापा बढ़ रहा है, तो इसे केवल लुक से जुड़ी समस्या न समझें। यह शरीर के कई अंगों के लिए खतरा बन सकता है। समय रहते वजन काबू में करके और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।





