सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में बनेगी जांच समिति, तीन महीने में रिपोर्ट देने का प्रस्ताव
मुंबई। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर जारी विवाद अब बड़े प्रशासनिक कदम की ओर बढ़ गया है। अभ्यर्थियों के लगातार विरोध और आयोग के कामकाज पर उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एमपीएससी के पूर्व और मौजूदा अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज की जांच के लिए समिति गठित करने की सिफारिश की है। यह सिफारिश महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा को भेजी गई है।
सरकार की ओर से प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपे जाने की बात कही गई है। समिति को अपनी जांच पूरी कर तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने का प्रस्ताव है। इसके बाद समिति के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
प्रश्नपत्र लीक और अनियमितताओं पर बढ़ा दबाव
एमपीएससी की परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा व्यवस्था में बदलाव, भर्ती प्रक्रिया के लंबित रहने और आयोग के कामकाज को लेकर अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती गई है। पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में आयोग के अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग भी शामिल है।
मुख्यमंत्री की ओर से जांच समिति की सिफारिश को इसी बढ़ते दबाव के बीच सरकार के बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। जांच के दायरे में पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों के साथ आयोग के सदस्य भी शामिल होंगे, जिससे एमपीएससी के कामकाज से जुड़े पुराने और मौजूदा फैसलों की भी पड़ताल हो सकती है।
संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत कार्रवाई की तैयारी
यह पूरी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत आगे बढ़ाने की सिफारिश की गई है। यह अनुच्छेद लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने तथा निलंबित करने से संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा है। सरकार का कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आयोग के अध्यक्ष और सदस्य संवैधानिक पदों पर होते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है।
सिर्फ अध्यक्ष नहीं, पूरे कार्यकाल की पड़ताल
प्रस्तावित जांच का दायरा केवल मौजूदा विवाद तक सीमित नहीं रहने वाला है। सरकार ने पूर्व और मौजूदा अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज की व्यापक जांच की सिफारिश की है। इससे आयोग की कार्यप्रणाली, परीक्षा व्यवस्था और सामने आए विवादों से जुड़े निर्णयों की जांच का रास्ता खुल सकता है।
एमपीएससी सचिव पर भी हो चुकी है कार्रवाई
एमपीएससी विवाद के बीच महाराष्ट्र सरकार ने आयोग के सचिव महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने का फैसला भी किया है। इससे पहले अभ्यर्थियों ने आयोग के अध्यक्ष और सचिव दोनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी।
अभ्यर्थियों के आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा दांव
एमपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों का असंतोष लगातार सामने आ रहा है। ऐसे में फडणवीस सरकार की जांच समिति बनाने की सिफारिश को विवाद को संस्थागत और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए सुलझाने की कोशिश माना जा रहा है।
अब निगाहें राज्यपाल के स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई और प्रस्तावित जांच समिति के गठन पर टिकी हैं। तीन महीने में रिपोर्ट आने के बाद एमपीएससी के अध्यक्षों और सदस्यों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
मुख्य बातें
- एमपीएससी के पूर्व और मौजूदा अध्यक्षों की जांच का प्रस्ताव।
- आयोग के सदस्यों का कामकाज भी जांच के दायरे में।
- सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति बनाने की सिफारिश।
- तीन महीने में रिपोर्ट देने का प्रस्ताव।
- संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी।
- पुणे में अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन जारी।





