Thursday, March 5, 2026
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दहेज प्रथा भारतीय समाज में एक कुरीति के समान- नीरज पांडेय

जनपद में चलाए जा रहे मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत अमेठी महिला स्वैच्छिक संस्थान एवं सहारा जीवन जन कल्याण चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में बाल श्रम एवं दहेज प्रथा को लेकर गुरुकुल अकादमी के बच्चों को जानकारी प्रदान की गई। विद्यालय के छात्राओं को जानकारी देते हुए सीडब्लूसी की सदस्या नीरज पांडेय ने कहा कि दहेज प्रथा भारतीय समाज में एक कुरीति के समान है। दहेज प्रथा ना केवल किसी सभ्य समाज के लिए अभिशाप है, बल्कि यह नारी के दमन की प्रतीक एक प्रथा है। दहेज प्रथा भारतीय समाज में काफी समय से प्रचलित रही है। दहेज के नाम पर कितनी ही लड़कियों को अपने जीवन का बलिदान करना पड़ा है।

सरकार द्वारा किए गए अनेक प्रयासों और सख्त कानूनों के कारण आज दहेज प्रथा पर कानूनी रूप से रोक लगी है उसके लिए हम सभी को आगे आना होगा। गुरुकुल अकादमी के प्रबंधक ओपी सिंह ने कहा कि बालश्रम से तात्पर्य बच्चों को ऐसे काम पर लगाने से है जो उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास के लिए हानिकारक है, और जो उनकी शिक्षा और खेलकूद के अधिकारों में बाधा डालता है। भारत में, 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी खतरनाक काम में लगाना प्रतिबंधित है, और बाल श्रम निषेध एवं विनियमन अधिनियम, 1986 के तहत इस पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस मौके पर संतोष श्रीवास्तव अजय यादव दिनेश तिवारी रीता सिंह स्वाति, रेणु सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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