Wednesday, February 11, 2026
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सर्दी में गर्माहट के लिए आप भी जलाते हैं लकड़ी? जानें कैसे समय से पहले मौत की वजह बन रहा इसका धुआं

सर्दियों के मौसम में अलाव या घर में लकड़ी जलाकर गर्मी हासिल करना बहुत सुकून भरा लगता है, लेकिन एक नई रिसर्च ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। साइंस एडवांसेज जर्नल में पब्लिश एक रिपोर्ट के अनुसार, घर में लकड़ी जलाना वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण है और यह समय से पहले होने वाली मौतों से भी जुड़ा हुआ है।

ठंड की ठिठुरती रातों में अलाव या अंगीठी के पास बैठकर गर्मी लेना किसे अच्छा नहीं लगता? लेकिन क्या आपको मालूम है कि जिसे आप सुकून का जरिया मानते हैं, वह असल में एक ‘साइलेंट किलर’ साबित हो रहा है?

एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि घर में जलने वाली लकड़ी सिर्फ धुआं ही नहीं फैला रही, बल्कि यह हजारों लोगों की समय से पहले मौत का कारण भी बन रही है। आइए, इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं इस बारे में।

सर्दियों में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि सर्दियों के दौरान हवा में मौजूद PM2.5 प्रदूषण का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ घरों में लकड़ी जलाने से आता है। इसका मतलब है कि ठंड के महीनों में यह महीन कणों वाले प्रदूषण का सबसे बड़ा सिंगल सोर्स है।

दिल की बीमारियों का खतरा

शोधकर्ताओं ने पाया कि लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं हवा में महीन कणों की मात्रा को बढ़ा देता है। यह सीधे तौर पर दिल से जुड़ी बीमारियों (Cardiovascular Diseases) के खतरे को बढ़ाता है।

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डैनियल हॉर्टन का कहना है, “हम अक्सर जंगल की आग के धुएं के बुरे प्रभावों के बारे में सुनते हैं, लेकिन हम अपने घरों में गर्मी के लिए लकड़ी जलाने के परिणामों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते।”

हर साल हो रहीं हजारों मौतें

स्टडी के मॉडल से पता चला है कि अमेरिका में आवासीय लकड़ी जलाने से होने वाला प्रदूषण हर साल लगभग 8,600 समय से पहले होने वाली मौतों से जुड़ा हुआ है। यह आंकड़ा बताता है कि यह समस्या कितनी गंभीर हो सकती है।

शहरों और उपनगरों पर असर लकड़ी जलाने का असर सिर्फ उसी घर तक सीमित नहीं रहता जहां वह जलाई जा रही है। शोधकर्ताओं ने एक हाई-रेजोल्यूशन मॉडल का उपयोग किया जिसमें मौसम, हवा, तापमान और इलाके की बनावट को शामिल किया गया था।

उन्होंने पाया कि:

  • लकड़ी जलाने से निकलने वाला धुआं उपनगरों से बहकर घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में चला जाता है।
  • भले ही शहर के मुख्य इलाकों में लकड़ी कम जलाई जाती हो, लेकिन हवा के साथ आने वाला धुआं वहां की हवा को भी जहरीला बना देता है।
  • गर्म जलवायु वाले शहरों में भी ठंड के दौरान या मजे के लिए जलाई गई लकड़ी प्रदूषण फैलाती है।

क्या है समाधान?

अच्छी बात यह है कि इस समस्या का समाधान भी मुमकिन है। प्रोफेसर हॉर्टन के अनुसार, बहुत कम घर ही गर्मी के लिए पूरी तरह लकड़ी पर निर्भर होते हैं। इसलिए, अगर हम लकड़ी जलाने वाले चूल्हों या अंगीठियों की जगह घर को गर्म करने के लिए स्वच्छ उपकरणों या बिना जलने वाले स्रोतों का इस्तेमाल करें, तो हवा की गुणवत्ता में भारी सुधार हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि लकड़ी के स्टोव, बॉयलर और फायरप्लेस की जगह मॉडर्न हीटिंग टूल्स को अपनाना चाहिए। यह छोटा-सा बदलाव हवा में खतरनाक कणों को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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