कैबिनेट के फैसले पर उठे सवालों के बीच मुख्यमंत्री ने रखी सरकार की दलील, किसानों और दुग्ध उत्पादन के बीच बताया सीधा संबंध
नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में कैबिनेट के एक फैसले को लेकर चर्चा के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सरकार के निर्णय का बचाव किया है। उन्होंने किसानों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सवाल किया कि यदि किसान ही नहीं होंगे, तो दूध कहां से आएगा? मुख्यमंत्री ने अपने बयान के जरिए यह समझाने की कोशिश की कि कृषि और दुग्ध उत्पादन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
डीके शिवकुमार ने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति और उनके हितों का ध्यान रखना जरूरी है। दूध का उत्पादन केवल डेयरी उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे किसानों और पशुपालकों की मेहनत भी शामिल है। ऐसे में किसानों को नजरअंदाज करके दुग्ध उत्पादन व्यवस्था को मजबूत नहीं बनाया जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कैबिनेट के फैसले का समर्थन करते हुए इसकी वजहें भी गिनाईं। उनका कहना है कि सरकार के निर्णयों को किसानों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दुग्ध उत्पादन से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
किसानों की आय और डेयरी व्यवस्था पर जोर
उन्होंने किसानों के योगदान को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। दूध उत्पादन से जुड़े लोगों की आर्थिक मजबूती का असर सीधे डेयरी क्षेत्र पर पड़ता है। इसलिए किसानों के हित में लिए गए फैसलों को व्यापक ग्रामीण विकास के नजरिए से देखना चाहिए।
डीके शिवकुमार के इस बयान के बाद कैबिनेट के फैसले और उसके पीछे सरकार की दलीलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर नजर रहेगी।


